रविवार का सदुपयोग-अंश : 179 उत्तरवाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 179 उत्तरवाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 179 उत्तरवाँ  सौहार्द्र पर्व होली: रंगों में बसती है समाज की समरसता की सौगात “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥” होली का पर्व उदारता व सहिष्णुता का उत्सव है, प्रेम एवं सौहार्द्र का शाश्वत प्रतीक… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 179 उत्तरवाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 178 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 178 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 178 वाँ  नई दिल्ली एआई समिट 2026: भारत बनने जा रहा है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ग्लोबल लीडर फरवरी 2026 में नई दिल्ली ने एक ऐसे ऐतिहासिक आयोजन की मेजबानी की जिसने भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 178 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 177 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 177 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 177 वाँ  विकसित राजस्थान @ 2047 को समर्पित राजस्थान बजट 2026-27 “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥” सभी सुखी हों, सभी निरोग हों, सभी का कल्याण हो और कोई भी दुःखी न रहे। यह… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 177 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 176 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 176 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 176 वाँ  राष्ट्रनीति स्वर्प्रथम जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। भारत की सभ्यता और राजनीति का मूल भाव सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में जब आर्थिक प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखलाएँ, तकनीकी प्रभुत्व और रणनीतिक साझेदारियाँ… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 176 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 175 वाँ

रविवार का सदुपयोग – अंश : 175 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 175 वाँ  मोदी सरकार का बजट 2026: विकास की गति को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की तैयारी उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ अर्थात कार्य केवल कल्पनाओं से नहीं, बल्कि निरंतर… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 175 वाँ

रविवार का सदुपयोग-अंश : 174 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 174 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 174 वाँ  गणतंत्र दिवस विशेष भारत का गणतंत्र: जनचेतना से उपजी राष्ट्रशक्ति का उत्सव प्रजा सुखे सुखं राज्ञःप्रजानां च हिते हितम्।नात्मप्रियं हितं राज्ञःप्रजानां तु प्रियं हितम्॥ यह श्लोक भारतीय शासन-दर्शन की आत्मा को प्रकट करता है। इसमें स्पष्ट रूप… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 174 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 173 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 173 वाँ रविवार का सदुपयोग  साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 173 वाँ  संस्कार: हमारी विरासत, हमारी अमूल्य निधि, भविष्य की पीढ़ी को संस्कारवान बनाना हमारा दायित्व न चोरहार्यं न च राजहार्यं, न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि।विद्या धनं सर्वधन प्रधानं,संस्कार युक्तं तु तदेव सत्यम्॥ संस्कार वह अदृश्य धागा है… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 173 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 172 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 172 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 172 वाँ  मकर संक्रांति : उत्तरायण के साथ धर्म, तप और परिवर्तन का महापर्व आयनेन दिशां भेदः कालचक्रे प्रवर्तते।यदा सूर्य उत्तरं याति तदा धर्मः प्रबोधते॥ भारतीय संस्कृति में पर्व केवल तिथि या परंपरा नहीं होते, वे जीवन को… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 172 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 171 वाँ

रविवार का सदुपयोग – अंश : 171 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 171 वाँ  माँ :अनुभूतियों से भरा हृदय और अव्यक्त रिक्तता का जन्मदिन : जन्मदिवस पर भावपूर्ण पुण्यस्मरण…..”माँ” मां, भावों को शब्दों में बाँध पाना अत्यन्त कठिन है। आपके स्थान को न कोई संबंध भर सकता है, न… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 171 वाँ

रविवार का सदुपयोग-अंश : 170 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 170 वाँ रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 170 वाँ  नई आशाओं और आकांक्षाओं के साथ स्वागत 2026 सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥ यही भारतीय चिंतन की मूल भावना है, जिसमें व्यक्तिगत हित नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और सम्पूर्ण मानवता… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 170 वाँ