
रविवार का सदुपयोग
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
अंश : 175 वाँ
मोदी सरकार का बजट 2026: विकास की गति को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की तैयारी
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
अर्थात कार्य केवल कल्पनाओं से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास से सिद्ध होते हैं। जो समाज, जो राष्ट्र अपने लक्ष्य को लेकर सजग और सक्रिय रहता है, वही प्रगति के नए मानक स्थापित करता है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आज भारत उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहाँ योजनाएँ केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बनकर बदलाव का माध्यम बन रही हैं। इसी निरंतर प्रयास और स्पष्ट दृष्टि का प्रतिबिंब होता है देश का वार्षिक बजटब जो केवल आय और व्यय का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास यात्रा का रोडमैप होता है।
मोदी सरकार का बजट 2026 ऐसे ही एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आने वाला है, जब भारत स्वयं को केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। बीते वर्षों में जिस प्रकार सरकार ने बुनियादी ढाँचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है, उसने देश की विकास गति को नई दिशा दी है। इसी क्रम में बजट 2026 से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस रफ्तार को और मजबूती देगा।
यदि पिछले बजट की बात करें, तो उसमें कई ऐसे प्रावधान देखने को मिले जिनका सीधा प्रभाव आम जनजीवन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ा। बुनियादी ढाँचे के लिए बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया, जिससे सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के विकास को गति मिली। बेहतर कनेक्टिविटी ने न केवल व्यापार को आसान बनाया, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा।
डिजिटल भारत की दिशा में भी पिछले बजट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डिजिटल भुगतान प्रणाली को प्रोत्साहन, स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण और तकनीकी नवाचार को समर्थन देने से भारत वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक सशक्त खिलाड़ी के रूप में उभरा। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े उद्योगों तक, डिजिटल प्लेटफॉर्म ने पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ाई।
कृषि क्षेत्र में भी पिछले बजट के प्रावधानों ने स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया। किसानों की आय बढ़ाने, कृषि अवसंरचना को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए योजनाओं को विस्तार दिया गया। इससे न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए।
सामाजिक क्षेत्र की बात करें, तो स्वास्थ्य और शिक्षा पर बढ़ता निवेश सरकार की दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं और शिक्षा के डिजिटल विस्तार ने समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद की। यह निवेश केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की मानव संसाधन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम रहा।
इन्हीं सकारात्मक प्रावधानों के कारण भारत की विकास गति में निरंतर सुधार देखने को मिला। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई, निवेश का माहौल बेहतर हुआ और भारत वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा। ऐसे में बजट 2026 से अपेक्षा और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यह उस समय आ रहा है जब देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।
बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार विकास और समावेशन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखेगी। एक ओर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से आर्थिक रफ्तार को तेज किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को भी मजबूती दी जाएगी। यह संतुलन ही किसी भी अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बनाता है।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों को बजट 2026 में और मजबूती मिलने की संभावना है। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा, एमएसएमई सेक्टर को सशक्त करना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत केंद्र के रूप में उभरेगा।
हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण भी आने वाले बजट के महत्वपूर्ण स्तंभ हो सकते हैं। स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सतत विकास पर निवेश बढ़ाकर सरकार न केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभा सकती है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित आधार भी तैयार कर सकती है। यह सोच भारत को विकास के साथ जिम्मेदारी का उदाहरण भी बनाती है।
डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के क्षेत्र में निवेश से प्रशासन अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकता है। बजट 2026 यदि इन क्षेत्रों में स्पष्ट दिशा देता है, तो शासन और सेवा वितरण में क्रांतिकारी बदलाव संभव है। इससे आम नागरिक को समय पर और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ मिल सकेंगी।
कुल मिलाकर, मोदी सरकार का बजट 2026 केवल आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं होगा, बल्कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की एक ठोस योजना के रूप में देखा जाएगा। पिछले बजटों में रखी गई मजबूत नींव पर खड़ा यह बजट विकास की गति को और तेज करने की क्षमता रखता है। देश की युवा शक्ति, उद्यमशीलता और नवाचार को यदि सही दिशा मिलती है, तो भारत आने वाले वर्षों में नई ऊँचाइयों को छू सकता है।
आज देश जिस विश्वास और उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें बजट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बजट न केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी भारत को तैयार करेगा। विकास की यह यात्रा तभी सफल होगी जब नीति, नियत और प्रयास तीनों एक दिशा में आगे बढ़ें।
-क्या आप मानते हैं कि मोदी सरकार का बजट 2026 भारत को विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में निर्णायक गति देगा?
-क्या आपको लगता है कि मोदी सरकार के पिछले बजटों की तरह यह बजट भी आम नागरिक के जीवन में प्रत्यक्ष और सकारात्मक बदलाव लाएगा?
हृदय की कलम से
आपका
धनंजय सिंह खींवसर