रविवार का सदुपयोग-अंश : 155 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 155 वाँ रविवार का सदुपयोग  साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 155 वाँ  निम्न और घटिया राजनीति का काला अध्याय: कांग्रेस और उसके समर्थित इंडी एलायंस द्वारा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दिवंगत पूज्य माताश्री और राष्ट्र सेवकों पर अशोभनीय, अमर्यादित टिप्पणियां लोकतंत्र को… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 155 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 154 वाँ

रविवार का सदुपयोग – अंश : 154 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 154 वाँ  आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) : चुनौती या अवसर स्वदेशी अपनाने से साकार होगी आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना “हमारी हर खरीद का एक ही मंत्र होना चाहिए…हम वही चुनें, जिसमें किसी भारतीय की मेहनत और परिश्रम समाया हो।… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 154 वाँ

रविवार का सदुपयोग-अंश : 153 वाँ

रविवार का सदुपयोग – अंश : 153 वाँ रविवार का सदुपयोग  साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 153 वाँ  आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) : चुनौती या अवसर बलवान् युवावयः श्रेष्ठो,दृढसंकल्पोऽभियुक्तिमान्।यदा जागर्ति लोकेषु,सर्वमस्य वशं व्रजेत्॥  युवा शक्ति हमेशा से परिवर्तन की धुरी रही है। समय साक्षी है कि जब भी कोई बड़ी चुनौती सामने आई, तो… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 153 वाँ

रविवार का सदुपयोग-अंश : 152 वाँ

रविवार का सदुपयोग – अंश : 152 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 152 वाँ  खास बनाम आम: राजनीति ने खड़ी की दीवारें, इंसानियत है सर्वोपरि  “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥” मनुष्य के जीवन की सबसे सुंदर सच्चाई यह है कि वह मूल रूप से स्वतंत्र और… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 152 वाँ

रविवार का सदुपयोग-अंश : 151 वाँ

रविवार का सदुपयोग – अंश : 151 वाँ रविवार का सदुपयोग  साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 151 वाँ  संयम : हमारे जीवन का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र है। श्लोक:”संयमे सर्वभूतेषु यो ददाति स्थिरामतिम्।स एव विजयी लोके, न च तं विजयं जयेत्॥”  संयम एक ऐसा गुण है जो सुनने में अत्यंत साधारण लगता है पर… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 151 वाँ

रविवार का सदुपयोग-अंश : 150 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 150 वाँ  रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 150 वाँ  KPL & LPL क्रिकेट का महाकुंभ: लोहावट के साथ साथ अब खींवसर भी भी रचेगा नया स्वर्णिम इतिहास “क्रीड़ायाम् समता दृष्टा, क्रीड़ायाम् तेजसः प्रभा।क्रीड़ायां जातया शक्तिः, ग्रामे ग्रामे दीप्यते॥” (अर्थ: खेलों में समानता, तेज, शक्ति और… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 150 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 149 वाँ 

रविवार का सदुपयोग – अंश : 149 वाँ रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 149 वाँ  सफलता का रहस्य, निरंतर प्रयास और कभी हार न मानने में है। “खम ठोक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पाँव उखड़!मानव जब जोर लगाता है,पत्थर पानी बन जाता है।”-राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’  ये पंक्तियाँ… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 149 वाँ 

रविवार का सदुपयोग-अंश : 148 वाँ

रविवार का ब्लॉग – अंश : 148 वाँ रविवार का ब्लॉग  साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | इस संवाद में मेरे मन के भाव अंश : 148 वाँ  संस्कार, सेवा और संगठन की नींव पर खड़ा है भारत का भविष्य समन्वयं धर्मं अनुयाति सर्वः, एकं मनः सर्वजनस्य स्यात्।एकं वचः सर्वजनस्य स्यात्, एकं हृदयं सर्वजनस्य स्यात्॥(ऋग्वेद 10.191.4) ऋग्वेद का यह श्लोक केवल… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 148 वाँ

रविवार का सदुपयोग-अंश : 147 वाँ

रविवार का सदुपयोग – अंश : 147 वाँ रविवार का सदुपयोग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास अंश : 147 वाँ  जीवन की अंतिम सच्चाई…..सब कुछ यही रह जाएगा जो प्रेम बांटोगे वही साथ जाएगा….! “धनानि भूमौ, पशवश्च गोष्ठे,नारी गृहद्वारि, सखा स्मशाने।देहश्चितायां, परमं हि धर्मः,अनुगच्छति केवलं कर्म धर्मः॥”(धन ज़मीन पर छूट जाता है, पशु बाड़े में… Continue reading रविवार का सदुपयोग-अंश : 147 वाँ

रविवार का ब्लॉग-अंश : 146 वाँ

रविवार का ब्लॉग – अंश : 146 वाँ  रविवार का ब्लॉग साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | इस संवाद में मेरे मन के भाव अंश : 146 वाँ  परिवार के साथ वेकेशन और डिजिटल ब्रेक…. छोटी सी आदत, ढेर सारी खुशियां! यह जीवन एक खूबसूरत सफर है और यह सफर और भी सुंदर हो जाता है यदि हम अपनों के साथ… Continue reading रविवार का ब्लॉग-अंश : 146 वाँ