रविवार का सदुपयोग – अंश : 127 वाँ


रविवार का सदुपयोग 

 
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
 
अंश : 127 वाँ 
 
8 फरवरी को दिल्ली में आ रही है भाजपा: अब झूठ, भ्रष्टाचार और नाकामी से मुक्ति का समय
 
हमारी दिल्ली जो कभी देश की पहचान और गौरव थी, आज भ्रष्टाचार, झूठे वादों और कुप्रबंधन का शिकार हो चुकी है। आम आदमी पार्टी ने बदलाव और ईमानदारी का सपना दिखाया था लेकिन नतीजा सिर्फ घोटाले, अव्यवस्था और जनता के साथ विश्वासघात निकला। जिन योजनाओं को ऐतिहासिक बताया गया था, वे या तो सिर्फ कागजों पर रहीं या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं।
 
दिल्ली की जनता ने जिस बदलाव की उम्मीद की थी, वह न सिर्फ अधूरा रहा बल्कि दिल्ली को और पीछे धकेल दिया। ट्रैफिक की समस्या विकराल हो चुकी है, प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है, जलभराव आम बात हो गई है और बिजली-पानी की योजनाएं सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित हैं। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए लेकिन सच्चाई यह है कि हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं। जहां तक स्वच्छता और नगर प्रबंधन की बात है, दिल्ली की गलियां और सड़कें कूड़े के ढेर में बदल चुकी हैं।
 
आज दिल्ली की सरकार घोटालों में गले तक डूबी हुई है। शराब घोटाले से लेकर शिक्षा और बस खरीद घोटाले तक मुख्यमंत्री और उनके मंत्री गंभीर आरोपों से घिरे हुए हैं। आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले ईमानदारी का दावा किया था लेकिन आज वही सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकारों में गिनी जा रही है। सरकार अपने घोटालों को छिपाने के लिए जनता को मुफ्त की रेवड़ियां बांट रही है, विज्ञापनों में करोड़ों रुपये बहा रही है और अपनी नाकामी को झूठे प्रचार से ढंकने की कोशिश कर रही है।
 
शराब नीति घोटाले ने यह साफ कर दिया कि आप सरकार किस तरह निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में फेरबदल करती है। इस घोटाले में न सिर्फ सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ कि दिल्ली सरकार के शीर्ष नेता इसमें संलिप्त हैं। शिक्षा घोटाले में सरकारी स्कूलों के निर्माण और मरम्मत में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया, जबकि बस खरीद घोटाले में नियमों का खुला उल्लंघन किया गया। दिल्ली की सड़कों पर सफाई व्यवस्था बदतर हो गई लेकिन सरकार केवल विज्ञापनों में अपने काम गिनवाने में व्यस्त रही।
 
विज्ञापन घोटाले को ही देख लें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि किस तरह दिल्ली सरकार ने जनता के पैसों को बर्बाद किया। जनता की मेहनत की कमाई को विकास कार्यों में लगाने की बजाय उसे अखबारों, टीवी और डिजिटल प्लेटफार्मों पर आप सरकार की छवि चमकाने में झोंक दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या दिल्ली को ऐसी सरकार चाहिए जो अपनी जिम्मेदारियों से भागती रहे और सिर्फ अपने नेताओं के फायदे के लिए सत्ता में बनी रहे।
 
दिल्ली का विकास भारतीय जनता पार्टी के साथ ही संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने जिस तरह वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, उसी तरह भाजपा दिल्ली को भी विश्वस्तरीय राजधानी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी सरकार ने दिल्ली के लिए 17,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं स्वीकृत की हैं जिनमें झुग्गीवासियों के लिए पक्के घर, नए फ्लाईओवर, सड़कें और मेट्रो विस्तार शामिल हैं। भाजपा का दृष्टिकोण स्पष्ट है—सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि ठोस योजनाओं और उनके क्रियान्वयन से दिल्ली का विकास करना।
 
जब दिल्ली में MCD भाजपा के पास थी, तब सफाई व्यवस्था से लेकर सड़कों के रखरखाव तक हर चीज व्यवस्थित थी। लेकिन जब आप को नगर निगम मिला, तो नतीजा सिर्फ झूठे वादे और दिल्ली की बदहाल स्थिति के रूप में सामने आया। भाजपा ने हमेशा सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है, जबकि आप सरकार केवल अपनी ब्रांडिंग में लगी रही।
 
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने हर क्षेत्र में सफलता हासिल की है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं ने देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है। जी20 की अध्यक्षता, चंद्रयान-3 की सफलता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की प्रभावशाली स्थिति यह साबित करती है कि सही नेतृत्व किस तरह देश को आगे ले जा सकता है। यही नेतृत्व दिल्ली को भी चाहिए जो सिर्फ वादे न करे बल्कि उन्हें पूरा भी करे। इसी के साथ देश के माध्यम
 
अब फैसला दिल्ली की जनता को लेना है। क्या दिल्ली को एक ऐसी सरकार चाहिए जो सिर्फ प्रचार करे और असली विकास की अनदेखी करे या फिर एक ऐसी सरकार जो जनता की समस्याओं का समाधान करे और दिल्ली को विश्वस्तरीय राजधानी बनाने के लिए काम करे।
 
-क्या आप मानते हैं कि दिल्ली को झूठ, भ्रष्टाचार और घोटालों से मुक्त करने का समय आ चुका है?
 
-क्या दिल्ली को एक मजबूत, पारदर्शी और विकासशील सरकार की आवश्यकता है?
 
जय हिंद
 
हृदय की कलम से
 
आपका 
धनंजय सिंह खींवसर