रविवार का सदुपयोग – अंश-बारहवाँ

 

रविवार का सदुपयोग 
 
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
 
अंश-बारहवाँ
 
दैनिक जीवन में खेल का महत्व
 
“स्वास्थ्य ही धन है और खेल स्वस्थ रहने की कुंजी है” यह कहावत पुरानी जरूर है लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी प्राचीन काल से चली आ रही है।
 
खेल जीवन का अनिवार्य अंग है, स्वस्थ शरीर में ही प्रखर मस्तिष्क रह सकता है….. बीमार शरीर में मस्तिष्क कैसे स्वस्थ रह सकता है? खेल-कूद उतने ही आवश्यक हैं जितना पढ़ाई के लिए पुस्तकें, पुस्तकों से मानसिक और आत्मिक विकास होता है, जबकि खेलकूद से शरीर स्वस्थ और सबल बनता है। 
 
आज आवश्यकता है की हमारी आगमी पीढ़ी जिसके लिए खेल अब मोबाइल मात्र में रह गए है उन्हें खेल के महत्व को समझाया जाए। साथ ही मेरा व्यक्तिगत मानना है की जहां तक संभव हो बड़े लोगों को भी खेल को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं रखने का प्रयास करना चाहिए। खेल से नेतृत्व, समान लक्ष्य के लिए मिलकर काम करना, साहस, सहनशीलता जैसे आवश्यक सद्गुणों का विकास होता है, खेल हमारे जीवन का एक आवश्यक तत्व है। यह हमें स्वस्थ और मजबूत रहने के लिए मार्गदर्शन करता है और हमारी शारीरिक क्षमताओं से भी परिचय भी करवाता है, खेल का हमारे जीवन का हिस्सा होना अत्यंत आवश्यक है।
 
वर्तमान पीढ़ी में बच्चे जन्म के साथ ही मोबाइल फ्रेंडली हो जाते हैं। टीवी और मोबाइल उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इस कारण वह ना तो कोई आउटडोर खेल खेलते हैं और ना ही शारीरिक श्रम करते हैं। आज हर अभिभावक यह चाहता है कि उनका बच्चा एक बड़ा अधिकारी बने, डॉक्टर बने, इंजीनियर बने – लेकिन ना के बराबर अभिभावक यह चाहते हैं कि उनका बच्चा  खेलों के क्षेत्र में अपना नाम रोशन करें और यह मानसिकता निसंदेह चिंताजनक है, इस मानसिकता को परिवर्तन करने की आवश्यकता है।
 
आज हमारे सामने ऐसे कई खिलाड़ियों के उदाहरण है जो भले ही पढ़ाई के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए हों लेकिन उन्होंने खेलों के माध्यम से पूरे विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। खेलों से मनुष्य के जीवन में न केवल आत्मविश्वास में वृद्धि होती है बल्कि अनुशासन, सहनशीलता और धैर्य जैसे गुणों का विकास होता है।
 
आज हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में खेलों को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है और यही मुख्य कारण है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन प्रदेशों के खिलाड़ी बेहतर तरीके से प्रदर्शन करते हैं। इसकी अपेक्षा में खेलों के क्षेत्र में राजस्थान बहुत पिछड़ा हुआ है। ऐसा नहीं है कि राजस्थान में प्रतिभाओं की कमी है लेकिन इन प्रतिभाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। इसलिए हमें इस बात को प्रमुखता से समझना होगा कि जीवन में खेल का उतना ही महत्व है जितना अध्ययन करना। यह समय है जब बचपन से ही बच्चों में खेलों के प्रति लगाव पैदा करने की आवश्यकता है जिससे वह भविष्य में खेलों के माध्यम से प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकें।
 
1. क्या आप भी मानते हैं कि मनुष्य के चहुंमुखी विकास के लिए खेलों का अत्यधिक महत्व है?
 
2. क्या आज की पीढ़ी खेलों की बजाय मोबाइल, टीवी व इंटरनेट को अधिक महत्व देती है?
 
3. क्या खेलों से शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास होता है?
 
हृदय की कलम से ! 
 
आपका 
 
– धनंजय सिंह खींवसर