रविवार का सदुपयोग – अंश : 204वाँ

रविवार का सदुपयोग
 
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
 
अंश : 204वाँ
 
पंचायत से नगर निकाय तक खिलेगा कमल, ट्रिपल इंजन सरकार से गांव से शहर तक बहेगी विकास की अविरल धारा
 
जब केंद्र में विकास का संकल्प हो, राज्य में उसी संकल्प को जमीन पर उतारने वाली सरकार हो और गांव से शहर तक स्थानीय नेतृत्व भी उसी विचारधारा के साथ आगे बढ़े, तब विकास केवल घोषणा नहीं रहता, वह जनजीवन में दिखाई देने वाला परिवर्तन बन जाता है। यही आज के राजस्थान की सबसे बड़ी ताकत है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में देश विकास और आत्मनिर्भरता की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में राजस्थान सरकार इसी विकास यात्रा को प्रदेश के गांव गांव और शहर शहर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। अब पंचायत से नगर निकाय तक भाजपा का कमल खिलता है तो यह विकासधारा और अधिक मजबूत, व्यापक और प्रभावी हो सकती है। यही ट्रिपल इंजन सरकार की शक्ति है।
 
इसीलिए राजस्थान के आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव केवल स्थानीय प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं हैं, बल्कि विकास की इस गति को गांव की चौपाल से लेकर शहर के वार्ड तक मजबूत करने का अवसर हैं। चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं और आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में भाजपा के सामने एक स्वाभाविक अवसर है कि वह केंद्र और राज्य सरकार की विकास सोच को स्थानीय स्तर तक उसी विश्वास और प्रतिबद्धता के साथ लेकर जाए।
 
राज्य सरकार की ओर से स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदम भी इसी दिशा की ओर संकेत करते हैं। नए नगर निकायों के गठन से उन क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और नागरिक सुविधाओं को अधिक व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने का अवसर मिला है, जहां आबादी और विकास की जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे कस्बों और उभरते हुए शहरी क्षेत्रों तक भी पहुंचे।
 
यह बदलाव केवल प्रशासनिक संख्या बढ़ने की बात नहीं है। किसी क्षेत्र को नगर निकाय का दर्जा मिलने का अर्थ है कि वहां शहरी सुविधाओं की योजना, विकास कार्यों की प्राथमिकता और नागरिक सेवाओं के प्रबंधन का स्वरूप भी बदलता है। छोटे कस्बों और तेजी से विकसित हो रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह परिवर्तन महत्वपूर्ण हो सकता है। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, पार्क, सार्वजनिक सुविधाओं और नियोजित विकास की जरूरत बढ़ेगी। ऐसे में स्थानीय निकायों की क्षमता और उनके पास उपलब्ध संसाधन विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
 
यही ट्रिपल इंजन की असली ताकत है। केंद्र में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार, राजस्थान में माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी की सरकार और यदि पंचायतों तथा नगर निकायों में भी भाजपा का कमल खिलता है, तो तीनों स्तरों पर विकास की एक ही सोच के साथ काम करने का मजबूत अवसर मिलेगा। केंद्र की योजनाओं को राज्य की प्राथमिकताओं से और राज्य की योजनाओं को स्थानीय जरूरतों से जोड़ना आसान होगा। भाजपा के जनप्रतिनिधि यदि जी जान से समर्पित होकर जनता के बीच काम करें, स्थानीय समस्याओं को समझें और विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाएं, तो गांव से शहर तक विकास की रफ्तार को नई ऊंचाई मिल सकती है।
 
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में गांवों को आत्मनिर्भर, सशक्त और सुविधासंपन्न बनाने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। ग्राम पंचायत विकास योजना, ई ग्राम स्वराज, डिजिटल प्रशासन और सहभागी योजना निर्माण जैसी व्यवस्थाओं ने गांवों में विकास की योजना और निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने का रास्ता खोला है। जब ऐसी केंद्रीय पहल को राज्य सरकार का मजबूत सहयोग और स्थानीय स्तर पर भाजपा के समर्पित जनप्रतिनिधियों का सक्रिय नेतृत्व मिलता है, तो योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने की संभावना और मजबूत होती है।
 
पंचायत विकास योजना की अवधारणा का मूल उद्देश्य यही है कि गांव के विकास की प्राथमिकताएं केवल ऊपर से तय न हों, बल्कि ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के स्तर पर स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं तैयार की जाएं। केंद्र सरकार के पंचायत विकास योजना पोर्टल के अनुसार पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर उपलब्ध संसाधनों के आधार पर सहभागी प्रक्रिया से विकास योजना तैयार करनी होती है।
 
राजस्थान जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविध राज्य में इस प्रकार की विकेंद्रीकृत योजना का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। जैसलमेर और बाड़मेर के गांवों की प्राथमिकताएं जयपुर या कोटा के शहरी क्षेत्रों से अलग हो सकती हैं। कहीं पानी सबसे बड़ा प्रश्न है, कहीं सड़क और परिवहन, कहीं सिंचाई, कहीं विद्यालय और स्वास्थ्य सुविधाएं तो कहीं रोजगार और स्थानीय बाजारों का विकास प्रमुख आवश्यकता हो सकती है। इसलिए स्थानीय निकायों को मजबूत करना केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि विकास को स्थानीय जरूरतों से जोड़ने का माध्यम भी है।
 
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में राजस्थान सरकार की विकास सोच का केंद्र गांव और शहर दोनों हैं। सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सिंचाई, स्थानीय आधारभूत ढांचे और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों को गति देने की दिशा में सरकार लगातार आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि स्थानीय निकायों में भी ऐसी सरकार की आवश्यकता महसूस होती है जो राज्य सरकार की विकास योजनाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके।
 
ग्रामीण विकास की चर्चा पंचायत भवनों से भी जुड़ती है। राजस्थान के सरकारी आर्थिक समीक्षा दस्तावेज में ग्राम पंचायत भवनों को ग्रामीण सचिवालय की अवधारणा से जोड़ते हुए पंचायत स्तर पर विभिन्न कार्यालयों को एक परिसर में उपलब्ध कराने की दिशा में योजना का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज में नए ग्राम पंचायत भवनों के निर्माण और उनके लिए भूमि उपलब्ध कराने की स्थिति भी दर्ज की गई है।
 
इस प्रकार देखा जाए तो पंचायत स्तर पर मजबूत आधारभूत ढांचा केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। यदि पंचायत कार्यालय आधुनिक सुविधाओं से युक्त हो, डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हों, ग्रामीण नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी और सेवाएं एक स्थान पर मिल सकें तथा ग्राम सभा प्रभावी ढंग से काम करे, तो स्थानीय शासन की पूरी व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकती है।
 
शहरी क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की आवश्यकता है। राजस्थान के नगरीय विकास विभाग की ओर से 2026 में शहरी सेवा शिविरों की व्यवस्था की गई है, जिनका उद्देश्य नागरिकों से संबंधित सेवाओं और लंबित प्रकरणों के निस्तारण को गति देना है। विभागीय आदेशों में शहरी सेवा शिविरों के माध्यम से प्राप्त आवेदनों के निस्तारण की समयसीमा से संबंधित निर्देश भी जारी किए गए हैं।
 
इसका अर्थ यह है कि गांव से शहर तक विकास की अगली चुनौती केवल नई योजनाएं घोषित करना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को इस तरह सक्षम बनाना है कि नागरिकों को सेवाएं समय पर मिलें। एक ओर गांवों में पंचायतों को अधिक सक्षम बनाना होगा, दूसरी ओर शहरों में नगरपालिकाओं और नगर परिषदों को बढ़ती आबादी के अनुरूप संसाधन, तकनीक और प्रशासनिक क्षमता देनी होगी।
 
ट्रिपल इंजन की अवधारणा की सबसे बड़ी संभावित ताकत इसी समन्वय में दिखाई देती है। यदि केंद्र सरकार किसी योजना के लिए वित्तीय सहायता या राष्ट्रीय स्तर की नीति उपलब्ध कराती है, राज्य सरकार उसके लिए प्रदेश स्तर पर बजट, प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय सहयोग सुनिश्चित करती है और स्थानीय निकाय जमीन पर उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाता है, तो योजना के परिणाम अपेक्षाकृत तेजी से सामने आ सकते हैं। इसके विपरीत यदि तीनों स्तरों पर प्राथमिकताएं अलग अलग हों, तो स्वीकृति, वित्त, क्रियान्वयन और निगरानी के बीच समय लग सकता है।
 
ट्रिपल इंजन सरकार की कल्पना का उद्देश्य यही है कि विकास की राह में अनावश्यक अड़चनें कम हों और केंद्र, राज्य तथा स्थानीय निकाय एक दूसरे के सहयोगी बनकर काम करें। भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधि यदि जनता की समस्याओं को अपनी प्राथमिकता बनाकर पूरी निष्ठा और समर्पण से कार्य करते हैं, तो विकास योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में बेहतर तालमेल बन सकता है। जनता भी ऐसे नेतृत्व से यही अपेक्षा रखती है कि वादों से आगे बढ़कर काम दिखाई दे और हर क्षेत्र को विकास का समान अवसर मिले।
 
राजस्थान में आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इन चुनावों में स्थानीय नेतृत्व का चयन होगा और अलग अलग क्षेत्रों की स्थानीय प्राथमिकताएं राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आएंगी। हालिया राजनीतिक गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि प्रमुख राजनीतिक दल स्थानीय चुनावों की तैयारियों में सक्रिय हैं और आरक्षण प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ संभावित उम्मीदवारों तथा संगठनात्मक तैयारियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
 
यह पूरी प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय निकायों के चुनाव केवल पार्षद या अध्यक्ष चुनने का माध्यम नहीं होते। ये चुनाव तय करते हैं कि अगले कुछ वर्षों में शहरों और कस्बों की स्थानीय प्राथमिकताओं को किस तरह राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। इसी तरह पंचायत चुनाव यह तय करते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय नेतृत्व किस दिशा में काम करेगा और ग्राम स्तर की समस्याओं को किस तरह सामने लाया जाएगा।
 
आज राजस्थान में विकास की चर्चा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह सकती। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का सबका साथ, सबका विकास का भाव और माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में राजस्थान सरकार की विकासोन्मुखी सोच तभी पूरी तरह प्रभावी होगी, जब गांव की पंचायत से लेकर शहर के नगर निकाय तक जनप्रतिनिधि उसी भावना के साथ काम करें। गांवों में अच्छी सड़क, सुरक्षित पेयजल, बेहतर विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार के अवसर बढ़ें तथा शहरों में स्वच्छता, यातायात, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक नागरिक सुविधाएं मजबूत हों, यही विकसित राजस्थान की तस्वीर है।
 
यही वह स्थान है जहां केंद्र और राज्य की योजनाओं के साथ स्थानीय नेतृत्व की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी योजना की सफलता का अंतिम पड़ाव स्थानीय नागरिक है। उसके लिए यह मायने रखता है कि सड़क बनी या नहीं, पानी पहुंचा या नहीं, नाली साफ हुई या नहीं, स्ट्रीट लाइट चली या नहीं, विद्यालय में सुविधाएं बढ़ीं या नहीं और सरकारी सेवा के लिए उसे कितने चक्कर लगाने पड़े।
 
इसलिए आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि नागरिकों के सामने एक स्पष्ट स्थानीय विकास दृष्टि प्रस्तुत करना भी होगी। किस वार्ड में क्या समस्या है, किस गांव में किस सुविधा की जरूरत है, किस कस्बे को किस प्रकार के बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है, स्थानीय रोजगार कैसे बढ़ाया जा सकता है और जल संकट से कैसे निपटा जा सकता है, इन प्रश्नों के ठोस उत्तर ही स्थानीय राजनीति को विकास की राजनीति में बदल सकते हैं।
 
यदि केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर नीति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में बेहतर तालमेल बनता है तो इसका लाभ अनेक क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। ग्रामीण विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के साथ जोड़ा जा सकता है। शहरी योजनाओं को मास्टर प्लान और वास्तविक जनसंख्या वृद्धि के अनुरूप बनाया जा सकता है। जल संरक्षण को गांव और शहर दोनों की विकास रणनीति का हिस्सा बनाया जा सकता है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार से नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ सकते हैं। इसी तरह स्थानीय निकायों को पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी क्षमता मिलने पर छोटे छोटे विकास कार्यों के लिए लंबी प्रक्रिया पर निर्भरता कम की जा सकती है।
 
लेकिन इसके साथ जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। विकास की गति बढ़ाने के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो, कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी हो, समयसीमा का पालन हो और नागरिकों को शिकायतों के समाधान की प्रभावी व्यवस्था मिले। पंचायत से लेकर नगर निगम तक जनप्रतिनिधियों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
 
राजस्थान के लिए आने वाला समय ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर विकास की नई संभावनाएं लेकर आया है। पंचायत से लेकर नगर निकाय तक यदि भाजपा का मजबूत नेतृत्व सामने आता है, तो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में चल रही विकासधारा को स्थानीय स्तर पर भी मजबूत आधार मिल सकता है। गांव की जरूरत गांव के स्तर पर समझने वाला और शहर की जरूरत शहर के स्तर पर समझने वाला भाजपा का जनप्रतिनिधि जब सरकार की योजनाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगा, तो विकास को नई ऊर्जा मिलना स्वाभाविक है।
 
इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक निरंतरता का अपना महत्व है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है परिणाम देने वाली कार्यसंस्कृति। यदि किसी क्षेत्र का जनप्रतिनिधि स्थानीय समस्याओं को समझकर प्राथमिकता तय करता है, विभागों से समन्वय करता है, स्वीकृत कार्यों की नियमित निगरानी करता है और जनता के बीच उपलब्ध रहता है, तो विकास योजनाओं का प्रभाव अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। यही भावना पंचायत से नगर निकाय तक मजबूत स्थानीय शासन की आधारशिला बन सकती है।
 
आज आवश्यकता इस बात की है कि राजस्थान का विकास राजधानी और बड़े शहरों तक सीमित न रहे। खेत और खलिहान से लेकर बाजार और नगर तक, छोटे गांव से लेकर बड़े शहर तक, हर क्षेत्र तक विकास की रोशनी पहुंचे। भाजपा की राजनीति का मूल भाव ही अंत्योदय और जनसेवा है। इसलिए पंचायतों और नगर निकायों में भाजपा का नेतृत्व स्थानीय जरूरतों को समझते हुए विकास की उसी भावना को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।
 
ट्रिपल इंजन की अवधारणा को इसी व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। केंद्र की नीतिगत दिशा, राज्य की प्रशासनिक क्षमता और स्थानीय निकायों की जमीन से जुड़ी कार्यक्षमता यदि एक दिशा में आगे बढ़ें तो विकास की प्रक्रिया में बेहतर समन्वय की संभावना बनती है। लेकिन इस समन्वय को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए जनप्रतिनिधियों की सक्रियता, प्रशासन की जवाबदेही और जनता की भागीदारी आवश्यक होगी।
 
राजस्थान के सामने अब एक बड़ा अवसर है। स्थानीय निकायों की चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। भाजपा संगठन पूरी ऊर्जा और तैयारी के साथ इस अवसर को जनसेवा और विकास के संकल्प में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पंचायत से नगर निकाय तक भाजपा का कमल खिलता है तो माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में चल रही विकासधारा को स्थानीय स्तर पर भी मजबूत आधार मिलेगा।
 
राजस्थान की जनता विकास को अपनी आंखों के सामने देखना चाहती है। सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, रोजगार और मजबूत आधारभूत ढांचा हर परिवार के जीवन से जुड़े विषय हैं। जब केंद्र में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और राजस्थान में माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में भाजपा सरकारें विकास को प्राथमिकता दे रही हैं, तब पंचायत और नगर निकायों में भी भाजपा का मजबूत नेतृत्व इस विकास यात्रा को गांव और शहर की हर गली तक पहुंचाने की ताकत बन सकता है। यही ट्रिपल इंजन सरकार का विश्वास है, तीनों स्तर एक दिशा में चलें, एक लक्ष्य के लिए समर्पित होकर काम करें और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
 
अब समय है कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता पूरे उत्साह, विश्वास और समर्पण के साथ जनता के बीच पहुंचे। बूथ से लेकर पंचायत और नगर निकाय तक संगठन की ताकत तभी दिखाई देती है, जब कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के हर परिवार से जुड़ता है, उनकी बात सुनता है और विकास के संदेश को जन जन तक पहुंचाता है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का मार्गदर्शन और माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी का नेतृत्व हमारे सामने स्पष्ट दिशा प्रस्तुत करता है। हमें इसी विश्वास के साथ जी जान से जुटना है कि राजस्थान के गांव और शहर दोनों को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने में भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
 
कार्यकर्ताओं के लिए यह केवल चुनाव का समय नहीं, बल्कि अपने विचार, अपनी निष्ठा और अपनी जनसेवा की भावना को और मजबूती से सामने रखने का अवसर है। भाजपा का कार्यकर्ता संगठन की सबसे बड़ी शक्ति है। हमारा हर कार्यकर्ता जिस आत्मीयता से जनता के बीच रहता है, जिस समर्पण से उनकी समस्याओं को समझता है और जिस विश्वास के साथ विकास की बात करता है, वही भाजपा की वास्तविक पहचान है। पंचायत से नगर निकाय तक कमल खिलाने का संकल्प केवल एक राजनीतिक लक्ष्य नहीं, बल्कि राजस्थान को और मजबूत, समृद्ध और विकसित बनाने की सामूहिक आकांक्षा है।
 
क्या आप मानते हैं कि केंद्र में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, राजस्थान में माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी और स्थानीय निकायों में भाजपा की सरकार होने से विकास कार्यों में बेहतर समन्वय और गति आ सकती है?
 
क्या आप मानते हैं कि पंचायत से नगर निकाय तक भाजपा का कमल खिलने से गांव से शहर तक विकास की गति को नई ताकत मिलेगी?
 
हृदय की कलम से
 
आपका 
धनंजय सिंह खींवसर