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अंश : 203वाँ
राजस्थान में “वन स्टेट, वन इलेक्शन”…. मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में ऐतिहासिक पहल
राजस्थान ने देश में पहली बार “वन स्टेट, वन इलेक्शन” की दिशा में एक सार्थक और ऐतिहासिक पहल की है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। यह पहल राजस्थान को देश में इस व्यवस्था की शुरुआत करने वाला पहला राज्य बनाती है। एक साथ चुनाव कराने का यह कदम केवल चुनावी प्रक्रिया को सरल और व्यवस्थित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग, चुनावी गतिविधियों में लगने वाले समय को कम करने और विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है। राजस्थान के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश सरकार ने स्थानीय लोकतंत्र के दोनों प्रमुख स्तरों, पंचायत और नगरीय निकाय, को एक साथ चुनाव की व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय आने वाले समय में राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास की गति के लिए एक नई मिसाल बन सकता है।
“वन स्टेट, वन इलेक्शन” का मूल विचार यह है कि प्रदेश में अलग अलग समय पर बार बार होने वाले स्थानीय चुनावों के स्थान पर पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को एक समन्वित चुनावी व्यवस्था के अंतर्गत कराया जाए। राजस्थान के संदर्भ में यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश में ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर स्थानीय लोकतंत्र का दायरा बहुत व्यापक है। ग्राम पंचायत से लेकर नगर निकाय तक बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का चुनाव होता है। यदि इन चुनावों की प्रक्रिया अलग अलग समय पर होती है तो प्रशासन, सरकारी मशीनरी और राजनीतिक व्यवस्था को बार बार चुनावी तैयारियों में लगना पड़ता है। एक साथ चुनाव होने से इस पूरी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित करने की संभावना बनती है।
राजस्थान के लिए इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि प्रदेश देश में इस प्रकार की व्यवस्था लागू करने की दिशा में अग्रणी राज्य बन रहा है। वर्ष 2024 में भी राजस्थान सरकार की ओर से “वन स्टेट, वन इलेक्शन” की दिशा में आगे बढ़ने और पंचायत तथा स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ कराने की तैयारी की चर्चा सामने आई थी। उस समय यह भी उल्लेख किया गया था कि यदि राजस्थान में इसके लिए आवश्यक कानूनी व्यवस्था बनती है तो राजस्थान देश में ऐसा करने वाला पहला राज्य होगा। आज यह विचार केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि 2026 में पंचायत और निकाय चुनावों को एक साथ कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में राजस्थान सरकार की इस पहल को प्रदेश में बेहतर प्रशासनिक समन्वय और विकास कार्यों की निरंतरता से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण कई बार नए विकास कार्यों और सरकारी निर्णयों की गति प्रभावित होती है। अलग अलग समय पर चुनाव होने की स्थिति में प्रशासन को बार बार चुनावी दायित्वों में लगना पड़ता है। एक साथ चुनाव कराने से चुनावी प्रक्रिया को एक निर्धारित अवधि में समेटने और उसके बाद प्रशासनिक मशीनरी को विकास कार्यों पर अधिक निरंतरता के साथ ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण लाभ प्रशासनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के रूप में भी सामने आ सकता है। चुनाव कराने के लिए बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाते हैं। सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की तैयारी, चुनाव सामग्री, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं में व्यापक प्रशासनिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। यदि पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो इन व्यवस्थाओं को अधिक समन्वित तरीके से संचालित किया जा सकता है। इससे समय और संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावना बढ़ती है।
राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्य में यह बदलाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यहां बड़ी संख्या में गांव, कस्बे और शहर हैं तथा स्थानीय शासन की व्यवस्था लाखों नागरिकों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी हुई है। पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय विकास की महत्वपूर्ण इकाई हैं, जबकि नगरपालिकाएं, नगर परिषदें और नगर निगम शहरी क्षेत्रों की मूलभूत व्यवस्थाओं से जुड़े हैं। सड़क, पानी, सफाई, स्थानीय आधारभूत ढांचा, प्रकाश व्यवस्था, सामुदायिक सुविधाएं और अनेक स्थानीय विकास कार्य सीधे इन संस्थाओं से जुड़े होते हैं। ऐसे में स्थानीय निकायों की चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना अप्रत्यक्ष रूप से विकास की गति के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में राजस्थान सरकार की प्राथमिकताओं में विकास, सुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिखाई देता है। “वन स्टेट, वन इलेक्शन” इसी व्यापक सोच का एक हिस्सा माना जा सकता है। यह पहल केवल चुनावों को एक साथ कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक निरंतरता, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने की सोच भी जुड़ी हुई है।
इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चुनावों की बार बार होने वाली प्रक्रिया से सरकार और प्रशासन का ध्यान कई बार लंबे समय तक चुनावी गतिविधियों पर केंद्रित रहता है। चुनाव लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और उसका सुचारु संचालन आवश्यक है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के साथ साथ प्रदेश के विकास कार्य भी निरंतर चलते रहना जरूरी है। यदि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो चुनावी गतिविधियों को एक निर्धारित अवधि में पूरा करने के बाद प्रशासन को लंबे समय तक विकास कार्यों पर केंद्रित रहने का अवसर मिल सकता है।
राजस्थान सरकार की यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखे गए “एक देश, एक चुनाव” के व्यापक विचार से भी जुड़ती है। हालांकि राजस्थान की वर्तमान पहल का केंद्र प्रदेश के पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव हैं। इसलिए इसे राजस्थान की अपनी स्थानीय परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप उठाया गया कदम कहना अधिक उचित होगा। देश में एक साथ चुनाव की बहस जहां राष्ट्रीय स्तर पर चल रही है, वहीं राजस्थान ने स्थानीय स्तर पर पंचायत और निकाय चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में आगे बढ़कर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया है।
राजस्थान में होने वाली इस चुनावी व्यवस्था का पैमाना भी अपने आप में बड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 309 नगरीय निकायों और 14,403 पंचायतों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना है। इतनी बड़ी संख्या में स्थानीय संस्थाओं के चुनाव को एक समन्वित व्यवस्था के तहत कराना प्रशासनिक दृष्टि से भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। रिपोर्टों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना है और इसे निर्धारित समयसीमा में संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है।
इस पूरी प्रक्रिया में राजस्थान की जनता की भूमिका भी सबसे महत्वपूर्ण होगी। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता के मत में होती है। पंचायत हो या नगर निकाय, स्थानीय जनप्रतिनिधि सीधे लोगों के बीच रहकर स्थानीय समस्याओं और विकास की आवश्यकताओं से जुड़े होते हैं। इसलिए एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था के साथ यह भी जरूरी होगा कि मतदाता अपने मत का प्रयोग जागरूकता और जिम्मेदारी के साथ करें तथा स्थानीय मुद्दों और विकास की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर अपने प्रतिनिधियों का चयन करें।
यह पहल राजस्थान के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय शासन को मजबूत किए बिना समग्र विकास की कल्पना पूरी नहीं हो सकती। प्रदेश के बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों और गांवों तक विकास की आवश्यकताएं अलग अलग हैं। कहीं पेयजल और सड़क की जरूरत है, कहीं स्वच्छता और जल निकासी की, तो कहीं शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय आधारभूत सुविधाओं की। पंचायत और निकाय इन जरूरतों को जमीन पर लागू करने वाली महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। ऐसे में चुनावी व्यवस्था में समन्वय के साथ स्थानीय शासन की कार्यक्षमता पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा।
राजस्थान की यह पहल आने वाले समय में दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। यदि एक साथ चुनाव कराने से चुनावी खर्च, प्रशासनिक संसाधनों और समय का बेहतर उपयोग होता है तथा विकास कार्यों में बार बार आने वाले चुनावी व्यवधान कम होते हैं, तो इस मॉडल पर देश के अन्य राज्य भी विचार कर सकते हैं। यही कारण है कि राजस्थान की इस पहल को केवल प्रदेश की चुनावी व्यवस्था में बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुधार की एक संभावित दिशा के रूप में भी देखा जा रहा है।
राजस्थान की पहचान हमेशा से अपनी विशिष्ट सोच, व्यापक भौगोलिक विस्तार और चुनौतियों के बीच आगे बढ़ने की क्षमता के लिए रही है। ऐसे में “वन स्टेट, वन इलेक्शन” की दिशा में आगे बढ़ना प्रदेश की प्रशासनिक सोच में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। यह कदम इस बात का संकेत है कि चुनावी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के साथ साथ सरकार विकास और प्रशासन की निरंतरता को भी महत्व दे रही है।
आने वाले समय में इस पहल का वास्तविक प्रभाव तब स्पष्ट होगा जब चुनाव प्रक्रिया पूरी होकर निर्वाचित पंचायतों और निकायों का कामकाज शुरू होगा। यदि चुनावी प्रक्रिया अधिक सीमित अवधि में पूरी होती है, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में निरंतरता आती है, तो यह व्यवस्था राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपलब्धि साबित हो सकती है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में राजस्थान ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिस पर देश की नजर बनी हुई है।
राजस्थान में “वन स्टेट, वन इलेक्शन” की यह पहल केवल चुनाव की तारीखों को एक साथ लाने की कवायद नहीं है। इसके पीछे प्रशासनिक दक्षता, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और विकास कार्यों में निरंतरता बनाए रखने की एक बड़ी सोच दिखाई देती है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में राजस्थान द्वारा उठाया गया यह कदम यदि अपने उद्देश्यों में सफल रहता है, तो यह प्रदेश की शासन व्यवस्था को नई दिशा देने के साथ देश के सामने एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत कर सकता है, जिस पर आगे व्यापक स्तर पर चर्चा हो सकती है।
क्या आप मानते हैं कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव एक साथ होने से राजस्थान में विकास कार्यों की गति और प्रशासनिक कार्यक्षमता को और मजबूती मिल सकती है?
क्या आपके अनुसार राजस्थान की “वन स्टेट, वन इलेक्शन” पहल आने वाले समय में देश के दूसरे राज्यों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल बन सकती है?
हृदय की कलम से
आपका
धनंजय सिंह खींवसर