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साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
अंश : 177 वाँ
विकसित राजस्थान @ 2047 को समर्पित राजस्थान बजट 2026-27
“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥”
सभी सुखी हों, सभी निरोग हों, सभी का कल्याण हो और कोई भी दुःखी न रहे।
यह श्लोक विकसित राजस्थान 2047, समावेशी विकास, जनकल्याण और बजट की मूल भावना को बहुत सुंदर ढंग से प्रतिबिंबित करता है।
इस ऐतिहासिक बजट के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर मार्गदर्शक दृष्टि प्रदान करने वाले माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, राज्य के विकास को नई गति देने वाले माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी तथा वित्तीय संरचना को दूरदर्शिता के साथ आकार देने वाली माननीया उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री सुश्री दिया कुमारी जी की समन्वित नेतृत्व क्षमता महत्वपूर्ण रूप से परिलक्षित होती है। यह बजट केवल आय और व्यय का लेखा नहीं बल्कि वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समावेशी और आत्मनिर्भर राजस्थान के निर्माण का व्यापक संकल्प है।
राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक विस्तार, सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक चुनौतियों वाले राज्य में विकास की अवधारणा बहुआयामी होती है। यहाँ विकास का अर्थ केवल औद्योगिक वृद्धि नहीं बल्कि जल सुरक्षा, कृषि सुदृढ़ीकरण, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ, मजबूत अवसंरचना और व्यापक रोजगार अवसरों से है। वर्ष 2026-27 का बजट इन सभी आयामों को संतुलित रूप से समाहित करता हुआ दिखाई देता है।
राज्य की अर्थव्यवस्था निरंतर विस्तार की दिशा में अग्रसर है और बजट का आकार इस बढ़ती विकास यात्रा को प्रतिबिंबित करता है। उच्च पूंजीगत व्यय, दीर्घकालिक अवसंरचना निवेश और सामाजिक क्षेत्र में बढ़ते प्रावधान यह संकेत देते हैं कि सरकार अल्पकालिक लाभों की अपेक्षा स्थायी विकास को प्राथमिकता दे रही है।
राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास की गति को बनाए रखना किसी भी राज्य के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है, किंतु इस बजट में संतुलन स्थापित करने का प्रयास स्पष्ट दिखाई देता है।
अवसंरचना विकास को आर्थिक प्रगति की रीढ़ माना जाता है। बेहतर सड़क नेटवर्क, संपर्क मार्गों का विस्तार, पुलों और शहरी अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण व्यापार, उद्योग और पर्यटन को गति प्रदान करता है। जब परिवहन व्यवस्था सुगम होती है तो निवेश आकर्षित होता है, रोजगार बढ़ता है और क्षेत्रीय असमानताएँ कम होती हैं। यही कारण है कि बजट में दीर्घकालिक अवसंरचना निवेश को विशेष महत्व दिया गया है।
जल प्रबंधन राजस्थान के लिए सदैव प्राथमिक विषय रहा है। मरुस्थलीय परिस्थितियों वाले इस राज्य में पेयजल आपूर्ति, जल संरक्षण और दीर्घकालिक जल संसाधन विकास सामाजिक स्थिरता और आर्थिक प्रगति दोनों के लिए अनिवार्य हैं। बजट में ग्रामीण और शहरी जल आपूर्ति योजनाओं को सुदृढ़ करने, नल कनेक्शन विस्तार और जल संरचनाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ राजस्थान को राष्ट्रीय नेतृत्व की स्थिति में स्थापित करती हैं। मरुस्थलीय क्षेत्रों में बड़े सौर ऊर्जा पार्कों का विकास न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाता है बल्कि निवेश, रोजगार और तकनीकी नवाचार को भी प्रोत्साहित करता है। हरित विकास, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण संबंधी पहल यह दर्शाती हैं कि आर्थिक वृद्धि और प्रकृति के संतुलन को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई जा रही है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था राज्य की सामाजिक संरचना का आधार हैं। किसानों को सस्ती ऋण सुविधा, ब्याज अनुदान और कृषि निवेश को प्रोत्साहन देने वाले कदम ग्रामीण आय को स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। जब कृषि मजबूत होती है तो ग्रामीण बाजार सशक्त होते हैं, जिससे समग्र अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। ग्रामीण विकास योजनाएँ केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी बनती हैं।
शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते निवेश भविष्य की दिशा तय करते हैं। विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता, आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना और तकनीकी शिक्षा पर जोर नई पीढ़ी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है। ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में वही समाज आगे बढ़ता है जो शिक्षा और कौशल को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। विद्यार्थियों को तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना डिजिटल समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
युवा शक्ति किसी भी राज्य की सबसे बड़ी पूंजी होती है। स्वरोजगार योजनाएँ, आसान ऋण सुविधा, कौशल विकास कार्यक्रम और उद्यमिता प्रोत्साहन रोजगार सृजन की नई संभावनाएँ खोलते हैं। सरकारी नौकरियों के साथ साथ निजी क्षेत्र और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। यदि युवा आत्मनिर्भर बनते हैं तो राज्य की विकास गति स्वतः तेज हो जाती है।
स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सामाजिक सुरक्षा का मूल आधार है। चिकित्सा अवसंरचना को मजबूत करना, उपचार सुविधाओं की पहुँच बढ़ाना और जनस्वास्थ्य योजनाओं को प्रभावी बनाना स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए अनिवार्य है। स्वस्थ नागरिक ही उत्पादक अर्थव्यवस्था का निर्माण करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को मानव पूंजी निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
पर्यटन राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक संभावनाओं का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, सांस्कृतिक सर्किटों का विकास, ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहन और स्थानीय कारीगरों को अवसर प्रदान करना रोजगार सृजन के साथ साथ सांस्कृतिक गौरव को भी सुदृढ़ करता है। पर्यटन क्षेत्र में संतुलित विकास राज्य को वैश्विक मानचित्र पर और अधिक मजबूत स्थिति प्रदान कर सकता है।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन को भी विकास की मुख्यधारा में स्थान दिया गया है। जब महिलाएँ आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त होती हैं तो परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था तीनों मजबूत होते हैं। सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ, कौशल विकास अवसर और सुरक्षा संबंधी प्रावधान समावेशी विकास की दिशा को स्पष्ट करते हैं।
विकसित राजस्थान 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक न्याय, पर्यावरण संतुलन, सांस्कृतिक संरक्षण और तकनीकी प्रगति के समन्वय से निर्मित एक व्यापक दृष्टि है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर नीति सुधार, प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक होंगे।
चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन, जल संकट, गुणवत्तापूर्ण रोजगार की आवश्यकता और क्षेत्रीय असमानताओं को संतुलित करना दीर्घकालिक रणनीति की माँग करता है। किंतु यदि नीति, नियत और नेतृत्व एक दिशा में आगे बढ़ते रहें तो इन चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है।
विकास की वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। यही भावना इस बजट की मूल आत्मा के रूप में दिखाई देती है। आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक संवेदनशीलता का संतुलन ही किसी राज्य को वास्तविक अर्थों में विकसित बनाता है।
वर्ष 2026-27 का यह बजट आशा, विश्वास और उत्तरदायित्व का संगम प्रस्तुत करता है। यह वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करने का प्रयास है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता से विकसित राजस्थान 2047 का संकल्प निश्चित रूप से साकार होगा
क्या आप मानते हैं कि वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनने की दिशा में यह बजट पर्याप्त आधार प्रदान करता है?
क्या आप मानते हैं कि आर्थिक विकास के साथ सामाजिक समानता और पर्यावरण संतुलन को समान प्राथमिकता देना ही वास्तविक प्रगति का मार्ग है?
हृदय की कलम से
आपका
धनंजय सिंह खींवसर