रविवार का सदुपयोग – अंश : 199वाँ

रविवार का सदुपयोग
 
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
 
अंश : 199वाँ
 
उड्डयन के जनक और विरासत का सच्चा सम्मान: महाराज उम्मेद सिंह जी के नाम से हो जोधपुर एयरपोर्ट
 
राजस्थान की गौरवशाली धरती ने समय समय पर ऐसे अनेक दूरदर्शी शासक दिए हैं जिन्होंने केवल अपने राज्य का शासन ही नहीं संभाला बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की भी कल्पना की। मारवाड़ की समृद्ध विरासत में महाराज उम्मेद सिंह जी का नाम ऐसे ही दूरदर्शी शासकों में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने उस दौर में आधुनिक विकास की आवश्यकता को समझा, जब अधिकांश रियासतें पारंपरिक व्यवस्थाओं तक ही सीमित थीं। शिक्षा, चिकित्सा, सार्वजनिक निर्माण, जल प्रबंधन और आधुनिक परिवहन जैसे क्षेत्रों में उनके द्वारा उठाए गए कदम आज भी उनकी दूरदर्शी सोच का प्रमाण हैं। यही कारण है कि जब जोधपुर एयरपोर्ट के नए अत्याधुनिक टर्मिनल भवन का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के करकमलों द्वारा 4 जुलाई 2026 को हुआ, तब एक बार फिर यह विचार प्रबल हुआ कि क्या इस एयरपोर्ट को उस महान शासक के नाम से नहीं जाना जाना चाहिए जिन्होंने जोधपुर में नागरिक उड्डयन को प्रारंभिक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 
यह विषय मेरे लिए केवल एक विचार नहीं, बल्कि मारवाड़ की ऐतिहासिक विरासत के सम्मान से जुड़ी एक भावनात्मक अपेक्षा भी है। पूर्व में भी मैंने पत्राचार के माध्यम से संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं सक्षम प्राधिकारियों से विनम्र आग्रह किया था कि जोधपुर एयरपोर्ट का नाम महाराज उम्मेद सिंह जी के नाम पर रखा जाए। अब जबकि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के करकमलों द्वारा जोधपुर एयरपोर्ट के नए अत्याधुनिक टर्मिनल भवन का उद्घाटन हुआ है, यह अवसर पुनः इस महत्वपूर्ण विषय को सामने रखने का है। मैं एक बार फिर अत्यंत विनम्रतापूर्वक आग्रह करता हूँ कि जोधपुर में नागरिक उड्डयन के विकास, आधुनिक आधारभूत संरचनाओं के निर्माण और मारवाड़ के सर्वांगीण विकास में महाराज उम्मेद सिंह जी के ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देते हुए जोधपुर एयरपोर्ट का नाम ‘महाराज उम्मेद सिंह’ एयरपोर्ट रखा जाए। यह निर्णय केवल एक महान शासक के प्रति श्रद्धांजलि नहीं होगा, बल्कि हमारी समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक चेतना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का भी प्रतीक बनेगा।
 
वर्तमान में इस हवाई अड्डे का आधिकारिक नाम ‘जोधपुर एयरपोर्ट’ है। यह नाम निश्चित रूप से शहर की पहचान को दर्शाता है, लेकिन किसी भी ऐतिहासिक शहर की पहचान केवल उसके भौगोलिक नाम से नहीं होती, बल्कि उन महापुरुषों से भी होती है जिन्होंने उसे नई दिशा दी। भारत में अनेक हवाई अड्डों का नाम उन महान विभूतियों के नाम पर रखा गया है, जिनका उस क्षेत्र या देश के विकास में विशेष योगदान रहा है। ऐसे नाम केवल औपचारिक पहचान नहीं होते बल्कि वे इतिहास, संस्कृति और प्रेरणा के वाहक भी बनते हैं। यही कारण है कि यदि जोधपुर एयरपोर्ट का नाम महाराज उम्मेद सिंह जी के नाम पर रखा जाता है तो यह केवल नाम परिवर्तन नहीं होगा बल्कि मारवाड़ की गौरवशाली विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का ऐतिहासिक निर्णय होगा।
 
महाराज उम्मेद सिंह जी का व्यक्तित्व केवल एक शासक तक सीमित नहीं था। वे ऐसे दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता थे, जिन्होंने यह समझ लिया था कि आने वाले समय में किसी भी क्षेत्र की प्रगति केवल पारंपरिक साधनों से संभव नहीं होगी। आधुनिक परिवहन व्यवस्था, विशेषकर हवाई संपर्क, व्यापार, प्रशासन, पर्यटन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। इसी सोच के साथ उन्होंने जोधपुर में आधुनिक विमानन सुविधाओं के विकास को प्रोत्साहित किया। उनके शासनकाल में हवाई पट्टी के विकास और विमानन गतिविधियों को संरक्षण मिलने से जोधपुर पश्चिमी भारत के प्रमुख हवाई संपर्क केंद्रों में अपनी पहचान बनाने लगा। यही कारण है कि इतिहासकार उन्हें जोधपुर में नागरिक उड्डयन के विकास का महत्वपूर्ण आधार स्तंभ मानते हैं।
 
उस समय भारत में विमानन क्षेत्र अपने प्रारंभिक चरण में था। अधिकांश रियासतों में हवाई सुविधाओं की कल्पना भी नहीं की जाती थी, जबकि जोधपुर ने इस दिशा में उल्लेखनीय पहल की। यह किसी संयोग का परिणाम नहीं था, बल्कि महाराज उम्मेद सिंह जी की दूरदर्शी सोच और आधुनिक दृष्टिकोण का प्रतिफल था। उन्होंने यह समझ लिया था कि भविष्य में हवाई संपर्क केवल सुविधा नहीं रहेगा, बल्कि आर्थिक प्रगति और वैश्विक संपर्क का माध्यम बनेगा। आज जब जोधपुर देश के प्रमुख पर्यटन, रक्षा और औद्योगिक केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है, तब यह स्पष्ट दिखाई देता है कि उस समय लिए गए निर्णय कितने दूरगामी सिद्ध हुए।
 
महाराज उम्मेद सिंह जी के विकास कार्यों की चर्चा केवल विमानन तक सीमित नहीं है। उनके शासनकाल में अनेक ऐसे निर्माण कार्य हुए, जिन्होंने जोधपुर को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया। उम्मेद भवन पैलेस इसका सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। यह केवल एक भव्य महल नहीं, बल्कि उस समय आए भीषण अकाल के दौरान हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की दूरदर्शी योजना का परिणाम था। इसी प्रकार उन्होंने आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत संरचनाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में जोधपुर ने परंपरा और आधुनिकता के बीच एक संतुलित विकास मॉडल प्रस्तुत किया, जिसकी चर्चा आज भी सम्मान के साथ की जाती है।
 
आज जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देशभर में आधुनिक एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे, रेलवे स्टेशन और अन्य आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विकास हो रहा है, तब जोधपुर भी इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण भाग बन चुका है। नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन पश्चिमी राजस्थान की बढ़ती आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इससे पर्यटन, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। किंतु किसी भी आधुनिक निर्माण की वास्तविक गरिमा तब और बढ़ जाती है, जब वह अपनी ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा हो। विकास और विरासत का यही समन्वय भारत की सांस्कृतिक शक्ति है।
 
इसी कारण आज यह मांग केवल भावनाओं का विषय नहीं रह गई है, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों और सांस्कृतिक सम्मान का विषय भी बन चुकी है कि जोधपुर एयरपोर्ट का नाम उस व्यक्तित्व के नाम पर होना चाहिए, जिसने इस क्षेत्र में आधुनिक सोच की मजबूत नींव रखी। महाराज उम्मेद सिंह जी का योगदान इस सम्मान का स्वाभाविक आधार प्रस्तुत करता है।
 
 
 जोधपुर ऐसा शहर है जिसकी पहचान केवल मेहरानगढ़ दुर्ग, उम्मेद भवन पैलेस या मरुस्थलीय संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि उन दूरदर्शी निर्णयों से भी जुड़ी है जिन्होंने इसे आधुनिक भारत के प्रमुख शहरों में स्थान दिलाया। ऐसे में यदि जोधपुर एयरपोर्ट का नाम महाराज उम्मेद सिंह जी के नाम पर रखा जाता है तो यह इतिहास और वर्तमान के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा।
 
भारत में अनेक हवाई अड्डों का नाम उन विभूतियों के नाम पर रखा गया है, जिनका अपने क्षेत्र या राष्ट्र के विकास में असाधारण योगदान रहा है। ऐसे नाम केवल औपचारिक पहचान नहीं होते, बल्कि वे उस क्षेत्र के इतिहास को भी जीवंत रखते हैं। जब देश और विदेश से आने वाला कोई यात्री किसी महान व्यक्तित्व के नाम वाला हवाई अड्डा देखता है, तो उसके मन में स्वाभाविक रूप से उस व्यक्तित्व के बारे में जानने की जिज्ञासा उत्पन्न होती है। यही जिज्ञासा इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बनती है। यदि जोधपुर एयरपोर्ट को महाराज उम्मेद सिंह जी का नाम मिलता है, तो यह मारवाड़ की गौरवशाली विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देगा।
 
जोधपुर आज पर्यटन, रक्षा, हस्तशिल्प, उद्योग और शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है। प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरों का दर्शन करने आते हैं। ऐसे में एयरपोर्ट का नाम भी यदि उस शासक के नाम पर हो जिसने आधुनिक जोधपुर के विकास की मजबूत नींव रखी तो यह शहर की ऐतिहासिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगा। यह केवल स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान नहीं होगा बल्कि राजस्थान की समृद्ध विरासत को विश्व पटल पर और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर भी होगा।
 
यह भी स्पष्ट है कि किसी सार्वजनिक संस्थान का नामकरण केवल भावनाओं के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके पीछे उस व्यक्तित्व का ऐतिहासिक योगदान भी होना चाहिए। महाराज उम्मेद सिंह जी का आधुनिक जोधपुर के निर्माण, आधारभूत संरचनाओं के विकास और नागरिक उड्डयन को प्रोत्साहन देने में योगदान उन्हें इस सम्मान का एक मजबूत और स्वाभाविक दावेदार बनाता है। इसलिए यदि भविष्य में इस विषय पर विचार किया जाए, तो यह निर्णय इतिहास के साथ न्याय करने वाला कदम सिद्ध हो सकता है।
 
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। नए एयरपोर्ट, आधुनिक टर्मिनल, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचनाएँ और विरासत संरक्षण, ये सभी एक विकसित भारत की पहचान हैं। ऐसे समय में यदि जोधपुर एयरपोर्ट को महाराज उम्मेद सिंह जी के नाम से नई पहचान मिले, तो यह विकास और विरासत के समन्वय का एक प्रेरणादायी उदाहरण बन सकता है। इससे आने वाली पीढ़ियाँ भी यह जान सकेंगी कि आधुनिक जोधपुर के निर्माण में एक दूरदर्शी शासक का कितना महत्वपूर्ण योगदान रहा।
 
इतिहास उन्हीं व्यक्तित्वों को सदैव याद रखता है जिन्होंने अपने समय से आगे बढ़कर भविष्य की कल्पना की। महाराज उम्मेद सिंह जी ऐसे ही दूरदर्शी शासकों में से एक थे। उनके निर्णयों की दूरगामी सोच का परिणाम आज भी जोधपुर के विकास में स्पष्ट दिखाई देता है। इसलिए यदि जोधपुर एयरपोर्ट को उनके नाम से जाना जाए, तो यह केवल एक नामकरण नहीं होगा, बल्कि मारवाड़ की अस्मिता, गौरवशाली विरासत और आधुनिक विकास यात्रा को सच्चा सम्मान देने वाला ऐतिहासिक कदम होगा।
 
– क्या आप मानते हैं कि जोधपुर के आधुनिक विकास और नागरिक उड्डयन को प्रारंभिक दिशा देने वाले महाराज उम्मेद सिंह जी के सम्मान में जोधपुर एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखा जाना चाहिए?
 
– क्या आप मानते हैं कि जिस प्रकार देश के अनेक हवाई अड्डों को महान विभूतियों के नाम से नई पहचान मिली है, उसी प्रकार जोधपुर एयरपोर्ट का नाम ‘महाराज उम्मेद सिंह एयरपोर्ट’ रखकर मारवाड़ की गौरवशाली विरासत को राष्ट्रीय सम्मान दिया जाना चाहिए?
 
हृदय की कलम से
 
आपका 
धनंजय सिंह खींवसर