
रविवार का सदुपयोग
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
अंश : 194वाँ
10 जून, 2026…राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण कर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान : जनसेवा के 12 वर्ष, मोदी 3.0 के 2 वर्ष और विकसित भारत की अब तक के 4404 दिवस की अविरल राष्ट्रीय आराधना की यात्रा जारी
‘यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥’
(श्रीमद्भगवद्गीता 3.21)
10 जून, 2026 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हुआ, जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण कर प्रधानमंत्री के रूप में अब तक का सर्वाधिक कार्यकाल पूर्ण करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया। स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रसेवा का यह सबसे लंबा कार्यकाल है। विशेष बात यह है कि यह यात्रा किसी पूर्णविराम पर नहीं पहुँची है, बल्कि जनसेवा, सुशासन और विकसित भारत के संकल्प के साथ आज भी उसी ऊर्जा, उसी प्रतिबद्धता और उसी गति से अनवरत जारी है।
जब कोई नेतृत्व केवल शासन तक सीमित न रहकर जनआकांक्षाओं का प्रतीक बन जाता है, जब सत्ता का केंद्र स्वयं नहीं बल्कि राष्ट्र बन जाता है और जब प्रत्येक निर्णय का आधार जनकल्याण तथा राष्ट्रहित हो, तब इतिहास केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि कीर्तिमानों से लिखा जाता है। 10 जून, 2026 ऐसा ही एक ऐतिहासिक अवसर लेकर आया, जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण कर भारतीय लोकतंत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि निरंतर समर्पण, अथक परिश्रम, दूरदर्शी नेतृत्व और 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास की अभिव्यक्ति है।
राष्ट्रजीवन में कुछ अवसर ऐसे होते हैं जो समय की सामान्य धारा से ऊपर उठकर इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं। 4,399 दिवस की यह यात्रा भी ऐसा ही एक अवसर है। यह यात्रा केवल एक व्यक्ति के राजनीतिक जीवन की नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की कहानी है जिसने पिछले बारह वर्षों में स्वयं को नई ऊर्जा, नए आत्मविश्वास और नए संकल्प के साथ विश्व के सामने प्रस्तुत किया है। जनसेवा के 12 वर्ष पूर्ण करते हुए और मोदी 3.0 के दो वर्ष पूरे करते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व आज भी विकसित भारत के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर दिखाई देता है।
वर्ष 2014 में जब देश ने एक नए जनादेश के साथ परिवर्तन का संकल्प व्यक्त किया, तब करोड़ों भारतीयों की अपेक्षाएँ एक ऐसे नेतृत्व से जुड़ी थीं जो निर्णायक हो, पारदर्शी हो और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता हो। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने उस विश्वास को अपनी कार्यशैली का आधार बनाया। उन्होंने शासन को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। यही कारण है कि पिछले बारह वर्षों की यात्रा में विकास, सुशासन और जनकल्याण एक-दूसरे के पूरक बनकर उभरे।
इन वर्षों में भारत ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन का अनुभव किया है। वित्तीय समावेशन से लेकर डिजिटल क्रांति तक, स्वच्छता से लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा तक, अवसंरचना विकास से लेकर वैश्विक नेतृत्व तक, हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित हुए हैं। करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का अभियान हो, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाना हो या गरीबों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना हो, शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। यह परिवर्तन केवल नीतियों का नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति नागरिकों के बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है।
गरीब कल्याण को शासन की प्राथमिकता बनाने का प्रयास इस अवधि की प्रमुख विशेषताओं में रहा है। पक्के घर, स्वच्छ ईंधन, स्वच्छता सुविधाएँ, स्वास्थ्य सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं तक पहुँच को व्यापक रूप से बढ़ाया गया। लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे वर्गों को केंद्र में रखकर योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई दी।
भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में भी अनेक प्रयास किए गए। शिक्षा, उद्यमिता, वित्तीय सशक्तिकरण और नेतृत्व के अवसरों में वृद्धि ने महिलाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाया है। आज महिलाएँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय सहभागी और नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रही हैं। यह परिवर्तन नए भारत की सामाजिक शक्ति का परिचायक है।
युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी पूंजी मानते हुए नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता को निरंतर प्रोत्साहित किया गया। आज भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम विश्व के सबसे बड़े और सबसे सक्रिय इकोसिस्टम में गिना जाता है। तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं ने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। यह वही युवा शक्ति है जो विकसित भारत के संकल्प को गति देने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्ति मानी जा रही है।
डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत की कार्य संस्कृति और नागरिक सुविधाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाएँ, तकनीकी नवाचार और डिजिटल अवसंरचना ने भारत को वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया है। आज गाँव और शहर के बीच तकनीकी दूरी तेजी से कम हुई है। डिजिटल माध्यमों ने शासन को अधिक पारदर्शी, अधिक सुलभ और अधिक उत्तरदायी बनाया है।
अवसंरचना विकास के क्षेत्र में पिछले बारह वर्षों को परिवर्तनकारी काल के रूप में देखा जा सकता है। आधुनिक राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, रेलवे का आधुनिकीकरण, नए हवाई अड्डे, बंदरगाहों का विस्तार और लॉजिस्टिक नेटवर्क की मजबूती ने भारत की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान की है। यह विकास केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए तैयार की जा रही मजबूत नींव भी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक क्षमता के क्षेत्र में भी भारत ने आत्मविश्वासपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। सीमाओं की सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य हुआ है। आज भारत वैश्विक मंच पर अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति पहले से कहीं अधिक सक्षम दिखाई देता है।
विदेश नीति के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका निरंतर सशक्त हुई है। वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की सहभागिता बढ़ी है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी उपस्थिति अधिक प्रभावशाली हुई है। भारत आज केवल विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक विमर्श को दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में भी स्थापित हो रहा है। यह परिवर्तन देश की बढ़ती आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक क्षमता का परिचायक है।
भारत की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास भी इस कालखंड की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। भारतीय परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहरों और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए अनेक पहलें की गईं। विश्वभर में योग के प्रति बढ़ता आकर्षण और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान भारत की सॉफ्ट पावर को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कर रहा है।
9 जून, 2024 को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय जोड़ा। मोदी 3.0 के दो वर्षों में विकसित भारत के लक्ष्य को केंद्र में रखकर अनेक महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया गया। यह कालखंड केवल योजनाओं के विस्तार का नहीं, बल्कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में गति और संकल्प का काल माना जा रहा है।
आज जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण कर चुके हैं, तब यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। यह केवल समय की निरंतरता नहीं, बल्कि जनविश्वास की निरंतरता का भी प्रतीक है। लोकतंत्र में जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और पिछले बारह वर्षों की यात्रा इसी विश्वास की मजबूत नींव पर खड़ी दिखाई देती है। यह कीर्तिमान नेतृत्व, परिश्रम, प्रतिबद्धता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की भावना का प्रतीक बन चुका है।
विकसित भारत का संकल्प आज केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प बनता जा रहा है। यह ऐसा भारत बनाने की कल्पना है जो आर्थिक रूप से समृद्ध, सामाजिक रूप से समावेशी, तकनीकी रूप से उन्नत, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाला हो। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आने वाले वर्षों में भारत के सामने अनेक अवसर हैं। दुनिया की सबसे युवा आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार की क्षमता, बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और मजबूत लोकतांत्रिक परंपराएँ भारत को एक नई दिशा देने की क्षमता रखती हैं। ऐसे समय में आवश्यक है कि विकास की यह गति और अधिक व्यापक तथा समावेशी बने। यही वह मार्ग है जो विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुँचने का आधार बनेगा।
राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण होने का यह अवसर केवल उपलब्धियों का स्मरण नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति नए संकल्प का भी अवसर है। यह उन करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं का सम्मान है जिन्होंने एक विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का सपना देखा है। यह उस यात्रा का पड़ाव है जो अभी समाप्त नहीं हुई, बल्कि निरंतर आगे बढ़ रही है। जनसेवा के 12 वर्ष, मोदी 3.0 के 2 वर्ष और विकसित भारत की अब तक की 4,404 दिवस की यह अविरल राष्ट्रीय आराधना आने वाले वर्षों में भारत के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी।
– क्या आप मानते हैं कि राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण करने के बाद माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का यह कीर्तिमान भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है?
– क्या आप विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में मोदी जी की नेतृत्व क्षमता को बड़ी शक्ति मानते हैं?
हृदय की कलम से
आपका
धनंजय सिंह खींवसर
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10 जून, 2026…राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण कर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान : जनसेवा के 12 वर्ष, मोदी 3.0 के 2 वर्ष और विकसित भारत की अब तक के 4404 दिवस की अविरल राष्ट्रीय आराधना की यात्रा जारी
‘यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥’
(श्रीमद्भगवद्गीता 3.21)
10 जून, 2026 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हुआ, जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण कर प्रधानमंत्री के रूप में अब तक का सर्वाधिक कार्यकाल पूर्ण करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया। स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी भी प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रसेवा का यह सबसे लंबा कार्यकाल है। विशेष बात यह है कि यह यात्रा किसी पूर्णविराम पर नहीं पहुँची है, बल्कि जनसेवा, सुशासन और विकसित भारत के संकल्प के साथ आज भी उसी ऊर्जा, उसी प्रतिबद्धता और उसी गति से अनवरत जारी है।
जब कोई नेतृत्व केवल शासन तक सीमित न रहकर जनआकांक्षाओं का प्रतीक बन जाता है, जब सत्ता का केंद्र स्वयं नहीं बल्कि राष्ट्र बन जाता है और जब प्रत्येक निर्णय का आधार जनकल्याण तथा राष्ट्रहित हो, तब इतिहास केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि कीर्तिमानों से लिखा जाता है। 10 जून, 2026 ऐसा ही एक ऐतिहासिक अवसर लेकर आया, जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण कर भारतीय लोकतंत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि निरंतर समर्पण, अथक परिश्रम, दूरदर्शी नेतृत्व और 140 करोड़ भारतीयों के विश्वास की अभिव्यक्ति है।
राष्ट्रजीवन में कुछ अवसर ऐसे होते हैं जो समय की सामान्य धारा से ऊपर उठकर इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं। 4,399 दिवस की यह यात्रा भी ऐसा ही एक अवसर है। यह यात्रा केवल एक व्यक्ति के राजनीतिक जीवन की नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की कहानी है जिसने पिछले बारह वर्षों में स्वयं को नई ऊर्जा, नए आत्मविश्वास और नए संकल्प के साथ विश्व के सामने प्रस्तुत किया है। जनसेवा के 12 वर्ष पूर्ण करते हुए और मोदी 3.0 के दो वर्ष पूरे करते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व आज भी विकसित भारत के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर दिखाई देता है।
वर्ष 2014 में जब देश ने एक नए जनादेश के साथ परिवर्तन का संकल्प व्यक्त किया, तब करोड़ों भारतीयों की अपेक्षाएँ एक ऐसे नेतृत्व से जुड़ी थीं जो निर्णायक हो, पारदर्शी हो और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता हो। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने उस विश्वास को अपनी कार्यशैली का आधार बनाया। उन्होंने शासन को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। यही कारण है कि पिछले बारह वर्षों की यात्रा में विकास, सुशासन और जनकल्याण एक-दूसरे के पूरक बनकर उभरे।
इन वर्षों में भारत ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन का अनुभव किया है। वित्तीय समावेशन से लेकर डिजिटल क्रांति तक, स्वच्छता से लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा तक, अवसंरचना विकास से लेकर वैश्विक नेतृत्व तक, हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित हुए हैं। करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का अभियान हो, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाना हो या गरीबों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना हो, शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। यह परिवर्तन केवल नीतियों का नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति नागरिकों के बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है।
गरीब कल्याण को शासन की प्राथमिकता बनाने का प्रयास इस अवधि की प्रमुख विशेषताओं में रहा है। पक्के घर, स्वच्छ ईंधन, स्वच्छता सुविधाएँ, स्वास्थ्य सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं तक पहुँच को व्यापक रूप से बढ़ाया गया। लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे वर्गों को केंद्र में रखकर योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई दी।
भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में भी अनेक प्रयास किए गए। शिक्षा, उद्यमिता, वित्तीय सशक्तिकरण और नेतृत्व के अवसरों में वृद्धि ने महिलाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावशाली बनाया है। आज महिलाएँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय सहभागी और नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रही हैं। यह परिवर्तन नए भारत की सामाजिक शक्ति का परिचायक है।
युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी पूंजी मानते हुए नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता को निरंतर प्रोत्साहित किया गया। आज भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम विश्व के सबसे बड़े और सबसे सक्रिय इकोसिस्टम में गिना जाता है। तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं ने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। यह वही युवा शक्ति है जो विकसित भारत के संकल्प को गति देने वाली सबसे महत्वपूर्ण शक्ति मानी जा रही है।
डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत की कार्य संस्कृति और नागरिक सुविधाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाएँ, तकनीकी नवाचार और डिजिटल अवसंरचना ने भारत को वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया है। आज गाँव और शहर के बीच तकनीकी दूरी तेजी से कम हुई है। डिजिटल माध्यमों ने शासन को अधिक पारदर्शी, अधिक सुलभ और अधिक उत्तरदायी बनाया है।
अवसंरचना विकास के क्षेत्र में पिछले बारह वर्षों को परिवर्तनकारी काल के रूप में देखा जा सकता है। आधुनिक राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, रेलवे का आधुनिकीकरण, नए हवाई अड्डे, बंदरगाहों का विस्तार और लॉजिस्टिक नेटवर्क की मजबूती ने भारत की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान की है। यह विकास केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए तैयार की जा रही मजबूत नींव भी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक क्षमता के क्षेत्र में भी भारत ने आत्मविश्वासपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। सीमाओं की सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य हुआ है। आज भारत वैश्विक मंच पर अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखता है और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति पहले से कहीं अधिक सक्षम दिखाई देता है।
विदेश नीति के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका निरंतर सशक्त हुई है। वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की सहभागिता बढ़ी है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी उपस्थिति अधिक प्रभावशाली हुई है। भारत आज केवल विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक विमर्श को दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में भी स्थापित हो रहा है। यह परिवर्तन देश की बढ़ती आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक क्षमता का परिचायक है।
भारत की सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास भी इस कालखंड की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। भारतीय परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहरों और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए अनेक पहलें की गईं। विश्वभर में योग के प्रति बढ़ता आकर्षण और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान भारत की सॉफ्ट पावर को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कर रहा है।
9 जून, 2024 को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय जोड़ा। मोदी 3.0 के दो वर्षों में विकसित भारत के लक्ष्य को केंद्र में रखकर अनेक महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया गया। यह कालखंड केवल योजनाओं के विस्तार का नहीं, बल्कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में गति और संकल्प का काल माना जा रहा है।
आज जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण कर चुके हैं, तब यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। यह केवल समय की निरंतरता नहीं, बल्कि जनविश्वास की निरंतरता का भी प्रतीक है। लोकतंत्र में जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और पिछले बारह वर्षों की यात्रा इसी विश्वास की मजबूत नींव पर खड़ी दिखाई देती है। यह कीर्तिमान नेतृत्व, परिश्रम, प्रतिबद्धता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की भावना का प्रतीक बन चुका है।
विकसित भारत का संकल्प आज केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प बनता जा रहा है। यह ऐसा भारत बनाने की कल्पना है जो आर्थिक रूप से समृद्ध, सामाजिक रूप से समावेशी, तकनीकी रूप से उन्नत, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने वाला हो। इस लक्ष्य की प्राप्ति में सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आने वाले वर्षों में भारत के सामने अनेक अवसर हैं। दुनिया की सबसे युवा आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार की क्षमता, बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और मजबूत लोकतांत्रिक परंपराएँ भारत को एक नई दिशा देने की क्षमता रखती हैं। ऐसे समय में आवश्यक है कि विकास की यह गति और अधिक व्यापक तथा समावेशी बने। यही वह मार्ग है जो विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुँचने का आधार बनेगा।
राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण होने का यह अवसर केवल उपलब्धियों का स्मरण नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति नए संकल्प का भी अवसर है। यह उन करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं का सम्मान है जिन्होंने एक विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का सपना देखा है। यह उस यात्रा का पड़ाव है जो अभी समाप्त नहीं हुई, बल्कि निरंतर आगे बढ़ रही है। जनसेवा के 12 वर्ष, मोदी 3.0 के 2 वर्ष और विकसित भारत की अब तक की 4,404 दिवस की यह अविरल राष्ट्रीय आराधना आने वाले वर्षों में भारत के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी।
– क्या आप मानते हैं कि राष्ट्रसेवा के 4,399 दिवस पूर्ण करने के बाद माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का यह कीर्तिमान भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है?
– क्या आप विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में मोदी जी की नेतृत्व क्षमता को बड़ी शक्ति मानते हैं?
हृदय की कलम से
आपका
धनंजय सिंह खींवसर