रविवार का सदुपयोग – अंश-पन्द्रह

 
रविवार का सदुपयोग 
 
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
 
अंश-पन्द्रह 
 
बना रहें “पधारो म्हारे देश” का महत्व
 
“अतिथि देवो भव:” भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता के समान माना गया और इस संकल्पना को सिद्ध करता है राजस्थान का मेहमान सत्कार “पधारो म्हारे देश” का अपनत्व से परिपूर्ण यह वाक्य असंख्य देशी और विदेशी मेहमानों के हृदय में जगह बना चुका है लेकिन गत कुछ वर्षों से राजस्थान के हालात इस वाक्य के महत्व को कम कर चुके है को बेहद चिंताजनक है।
 
राजस्थान की संस्कृति, ऐतिहासिक भव्यता मेहमानों को आकर्षित करती है लेकिन गत दिनों में बढ़ते अपराध के ग्राफ ने मेहमानों के मन में एक भय जरूर पैदा किया है। शर्मसार करने वाले घटनाक्रम, कर्फ्यू, अघोषित नेट बंदी ने शांत राजस्थान की छवि को बड़ी ठेस पहुंची है।
 
प्रदेश के राजस्व में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला पर्यटन व्यवसाय 2 साल बाद पुनः व्यवस्थित हो रहा है। कोरोना काल के चलते पर्यटन उद्योग पूरी तरह से ठप पड़ा था। अब जब परिस्थितियां सामान्य होने लगी है तो सैलानियों का एक बार फिर राजस्थान के प्रति आकर्षण भी बढ़ने लगा है। लेकिन इन 2 वर्षों में प्रदेश में हालात भी काफी तेजी से बदले हैं। प्रदेश में की लचर कानून व्यवस्था को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। लूट, हत्या, डकैती, सांप्रदायिक तनाव जैसी बढ़ती घटनाओं ने कानून व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान खड़ा किया है। 
 
यदि मेहमानों ने राजस्थान से मुंह मोड़ लिया तो उनके मन में पुनः राजस्थान के प्रति विश्वास पैदा करना आसान नहीं होगा, पर्यटन उद्योग को एक बार पुनः साबित करने के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है साथ ही हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम यहां आने वाले पर्यटकों का वर्षों से चली आ रही “अतिथि देवो भव” की रवायत को अपनाते हुए उनका न केवल आदर और सत्कार करें बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी सहेजते हुए उन्हें शांत व सुरक्षित वातावरण का अहसास कराए।
 
यूं तो राजस्थान का इतिहास कई गौरव गाथाओं से सराबोर है लेकिन यहां की स्थापत्य कला, सभ्यता, लोक संस्कृति और अपणायत पर्यटकों को आकर्षित करती है…..न केवल देशी बल्कि विदेशी सैलानी भी राजस्थान की कला और संस्कृति को नजदीक से देखना पसंद करते हैं। 
 
प्रदेश के राजस्व अर्जन में पर्यटन उद्योग का बहुत अधिक योगदान है। प्रदेश में करीब 6 महीने पर्यटन सीजन रहती है और इस पर्यटन सीजन में इससे जुड़े लोग और लघु उद्योग है जिनकी पूरे वर्ष भर की आजीविका इसी पर निर्भर करती है। आज राजस्थान प्रदेश “डेस्टिनेशन वेडिंग” के रूप में भी अपनी एक अलग पहचान रखता है। जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, जैसलमेर हर वर्ष कई शाही शादियों के गवाह बनते है। न केवल भारत देश बल्कि विदेशों की शाही शादियां भी अब राजस्थान में होने लगी है, जिसका सबसे प्रमुख कारण यहां यह की समृद्ध लोक कला, साहित्य ,  स्थापत्य कला और आदर सत्कार है। इस तरह के डेस्टिनेशन वेडिंग होने से कई लोगों को रोजगार भी मिलता है।
 
राजस्थान में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहाँ की हर गांव ढाणी में ऐसे पर्यटन स्थल हैं जिन्हें यदि पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो आने वाले दिनों में यह आसपास के क्षेत्र वासियों के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन सकते हैं।
 
2 वर्ष के बाद अब एक बार फिर जब पर्यटन उद्योग पटरी पर लौटने लगा है…देशी विदेशी सैलानियों की आवक होने लगी है, ऐसे में हम सभी की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम पर्यटन उद्योग के महत्व को समझें, अपने आसपास की जो सांस्कृतिक धरोहर है, उनका संरक्षण करें,  यहां आने वाले अतिथियों का  पलक पावडे बिछा कर स्वागत करें….ताकि पर्यटक यहां से  अविस्मरणीय यादें लेकर लौटे।
 
एक और जहां पर्यटन का विकास हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर कुछ  चुनौतियां भी हमारे सामने हैं। आमतौर पर राजस्थान को शांत प्रदेश माना जाता रहा है लेकिन पिछले कुछ समय से यहां की लचर कानून व्यवस्था पर्यटन के लिए खतरा साबित हो रही है। लेकिन गत कुछ वर्षों में समाज कंटकों द्वारा पर्यटकों के साथ छेड़छाड़, लूटपाट, दुर्व्यवहार और लपकेबाजी ने यहां की साख को नुकसान पहुचाया है। आज पर्यटकों को सुरक्षित माहौल देना सबसे अधिक आवश्यक है। ऐसे में राज्य सरकार को इस दिशा में बेहतर तरीके से काम करने की आवश्यकता है। यहां आने वाला पर्यटक बिना किसी के साथ पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर सके यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
 
आइए हम सभी संकल्प ले कि हम प्रदेश के पर्यटन उद्योग को बढ़ाने में अपना योगदान देंगे और यहां आने वाले सैलानियों को बेहतर वातावरण प्रदान करेंगे। 
 
1. क्या आप भी मानते हैं पर्यटन उद्योग का प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है ?
 
2. क्या प्रदेश में ग्रामीण टूरिज्म संभावनाओं  बढ़ाने की आवश्यकता है ?
 
3. प्रदेश में यदि पर्यटन उद्योग तो नुकसान होता है तो क्या इसका जिम्मेदार लचर कानून व्यवस्था को मानते हो?
 
हृदय की कलम से ! 
 
आपका 
 
– धनंजय सिंह खींवसर