
रविवार का सदुपयोग
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
अंश – आंठवां
इस दीपोत्सव का संकल्प स्वदेशी को अपनाकर ,”वोकल फॉर लोकल” बने हम
सम्पूर्ण वर्ष हमारी दिवाली को रोशन बनाने के लिए दीपक बनाने वाले परिवारों के धर भी इस दिवाली रोशन रहें यह आपकी और हमारी जिम्मेदारी है और यह तब ही संभव है जब हम इस दिवाली स्वदेशी को अपनाकर ,”वोकल फॉर लोकल” बने।
कुछ दिनों में दीपावली का पर्व आने वाला है। 2 सालों बाद एक बार फिर दीपावली को लेकर आम जन के मन में काफी उत्साह और उमंग नजर आ रही है। इन 2 सालों में प्रकृति ने हमें बहुत कुछ सीखने का अवसर दिया है। महामारी की इस भयंकर त्रासदी में लोगों का जीवन मानो थम सा गया लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में एकजुट होकर इस त्रासदी का बेहतर तरीके से मुकाबला भी किया। आज जब हम एक बार फिर दीपावली का त्यौहार मनाने के लिए तैयार हैं तो हमें निश्चित रूप से इस बार इस दीपोत्सव स्वदेशी को अपनाकर ,”वोकल फॉर लोकल” के संकल्प को आत्मसात करते हुए स्वदेशी दीपावली मनाने का प्रयास करना चाहिए।
दीपावली हो या और कोई भी त्योहार, यह त्यौहार केवल हमारी धार्मिक आस्था का ही प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह हमारे सामाजिक और आर्थिक ढांचे को सहारा देने का माध्यम भी हैं। यदि हम ऐसे अवसर पर भी स्वदेशी सामान और अपने आसपास के छोटे कारोबारियों को सहारा और बढ़ावा नहीं देंगे तो फिर कब देंगे?
महामारी के इस दौर में हमें कई ऐसे जख्म दिए हैं जिन्हें भुलाना शायद संभव नहीं है, लेकिन साथ ही इस दौर ने हमें यह दिखा दिया कि हमारे आसपास रहने वाले लोग ही हमारे सच्चे साथी है।
महामारी के इस कालखंड में अपने आसपास के लोगों जैसे किराना दुकानदार, सब्जी वाला, दूध वाला आदि हमारे संकट में साथ खड़े नजर आए लेकिन आज
जब हमारी बारी आई है तो ऐसा लगता है कि शायद हम उनकी सेवाओं को लगभग भुला बैठे हैं।
आइए इस वर्ष संकल्प कीजिए की घर की साज सजावट में उपयोग आने वाली झालर और सजावट का सामान ही नहीं बल्कि मिट्टी में दीपक, मोमबत्ती, व अन्य घरेलू सामान की अपने आस पास के स्वदेशी उत्पाद खरीदने है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी देशवासियों से आव्हान किया कि भारतीयों द्वारा बनाई चीज खरीदना, ” वोकल फ़ॉर लोकल ” को हमे हमारे जीवन का हिस्सा बनाए।
आज की परिस्थितियों में त्योहार मनाने का अर्थ सिर्फ अपने उत्सव के बारे में सोचना ही नहीं है बल्कि सही मायनों में हम दिवाली तभी मना पाएंगे जब हम दूसरों के आनंद और उत्सव के बारे में सोचें। हम संकल्प ले कि इस दीपावली पर हम अपने आसपास व्यापार करने वाले व्यापारी, छोटे-बड़े स्वदेशी उत्पादकों को, स्थानीय दुकानदारों से ही सामान खरीदेंगे और इस बार की दीवाली को हम स्वदेशी उत्पादों के साथ, आत्मनिर्भर भारत की रोशनी से ही जगमग करेंगे।
1. क्या आप भी इस बार “वोकल फ़ॉर लोकल” की मुहिम में अपनी भागीदारी निभाते हुए स्थानीय दुकानदारों एवं व्यापारियों को प्रोत्साहित करेंगे ?
2. क्या आप भी इस बार स्वदेशी दीपावली मनाएंगे ?
|| भारत माता की जय ||
हृदय की कलम से !
आपका
– धनंजय सिंह खींवसर