
रविवार का सदुपयोग
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
अंश : 165 वाँ
2014 से 2025: विधायकों की संख्या 1035 से 1654 के साथ भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त और ‘मोदी है तो मुमकिन है’ की साकार होती परिकल्पना
उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
(अर्थात केवल इच्छा करने से सफलता नहीं मिलती; सफलता उन्हें मिलती है जो परिश्रम, संकल्प और नेतृत्व की शक्ति से आगे बढ़ते हैं।)
यह श्लोक ठीक उसी भावना को अभिव्यक्त करता है, जिसकी जीवंत मिसाल 2014 से 2025 के बीच भारतीय राजनीति में देखने को मिली…एक ऐसा दौर जिसने भाजपा को न सिर्फ मजबूती दी, बल्कि नए राजनीतिक इतिहास का निर्माण भी किया।
2014 में भाजपा के पास राज्यों में कुल 1035 विधायक थे। यह संख्या सम्मानजनक थी, लेकिन पार्टी के अनुसार भारत के बदलते स्वरूप को देखते हुए यह केवल शुरुआत थी। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने न केवल नई राजनीतिक सोच दी, बल्कि जनता में यह विश्वास भी जगाया कि राष्ट्रहित, विकास और पारदर्शिता को केंद्र में रखकर राजनीति की दिशा बदली जा सकती है। यही कारण था कि सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा की संगठनात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ गई।
2015 में कुछ राज्यों में चुनौतियाँ आईं और विधायक संख्या घटकर 997 रह गई। लेकिन भाजपा के नज़रिये से यह कोई गिरावट नहीं बल्कि “नए संघर्ष, नई तैयारी” का अवसर था। मोदी जी की शैली हमेशा से यही रही है कि किसी भी असफलता को स्थायी न बनने देना। इसी दृष्टि से संगठन का विस्तार किया गया, बूथ स्तर तक ढांचा मजबूत हुआ, और जनता तक योजनाओं के लाभ तेजी से पहुँचाए गए। परिणामस्वरूप 2016 में भाजपा फिर उठ खड़ी हुई और संख्या बढ़कर 1053 हो गई।
2017 वह वर्ष था जिसने भाजपा की राज्यों में मौजूदगी को पूरी तरह नया आकार दिया। उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत, उत्तराखंड में सत्ता वापसी और पूर्वोत्तर में बढ़ते प्रभाव ने भाजपा को अभूतपूर्व मजबूती दी। इसी वर्ष विधायक संख्या छलांग लगाकर 1365 पर पहुँची। यह वह क्षण था जब “मोदी है तो मुमकिन है” नारा होकर नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम बनकर दिखाई दिया। भाजपा के अनुसार, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की जनस्वीकार्यता और मजबूत नेतृत्व वह शक्ति थी जिसने संगठन और जनता दोनों को एक नई दिशा में आगे बढ़ाया।
2018 और 2019 के वर्ष मिश्रित रहे। कुछ राज्यों में सत्ता परिवर्तन हुआ, जिसके कारण संख्या क्रमशः 1184 और 1160 पर आ गई। लेकिन इसके बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही जनकल्याण योजनाओं-उज्ज्वला, जनधन, स्वच्छ भारत, DBT, डिजिटल इंडिया ने जनता में विश्वास को कमजोर होने नहीं दिया। भाजपा समझ चुकी थी कि लंबे कार्यकाल की कुंजी केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का सीधा समाधान है। इसी रणनीति के बल पर 2020 में संख्या फिर बढ़कर 1207 हो गई।
2021 और 2022 महामारी के कठिन वर्ष थे, लेकिन भाजपा ने इन वर्षों में भी अपनी संगठनात्मक रफ्तार बनाए रखी। मोदी नेतृत्व में संकट प्रबंधन, टीकाकरण अभियान और राहत प्रयासों ने जनता में भरोसा फिर मजबूत किया। 2021 में विधायक संख्या 1278 और 2022 में 1289 तक पहुँचना इसका स्पष्ट प्रमाण है। भाजपा के अनुसार, इन वर्षों के परिणाम ने यह सिद्ध किया कि कठिन परिस्थितियों में यदि नेतृत्व मजबूत और पारदर्शी हो तो जनता का विश्वास डगमगाता नहीं बल्कि और मजबूत होता है।
2023, 2024 और 2025 भाजपा के स्वर्णिम वर्ष कहे जा सकते हैं। 2023 में संख्या बढ़कर 1441 हुई। यह पहली बार था जब पार्टी की उपस्थिति लगभग हर बड़े राज्य में निर्णायक रूप से बढ़ गई। 2024 में यह संख्या और उछाल के साथ 1588 तक जा पहुँची और अंततः 2025 में भाजपा ने बिहार में नए इतिहास को छूते हुए 1654 विधायकों का रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। भाजपा के नज़रिये से यह केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक विशाल जनविश्वास की मुहर है, एक ऐसा भरोसा जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, उनकी कार्यशैली, उनके निर्णयों और उनकी दूरदृष्टि पर आधारित है।
पार्टी का मानना है कि भारत में 2014 से पहले की राजनीति और 2014 के बाद की राजनीति में जमीन-आसमान का अंतर है। जहाँ पहले राजनीति में टुकड़ों में सोच प्रचलित थी, वहीं मोदी युग में राष्ट्र प्रथम की व्यापक सोच ने जनता को एक बड़े परिवर्तन से जोड़ा। यही बदलाव राज्यों में भाजपा की निरंतर बढ़ती शक्ति के रूप में दिखाई दिया।
इन 11 वर्षों में भाजपा ने यह सिद्ध किया कि जब नेतृत्व निर्णायक हो, योजनाएँ जनहित में हों, और संगठन जमीन पर सक्रिय रहे तो सिर्फ जीतें नहीं, बल्कि इतिहास गढ़े जाते हैं। 1035 से 1654 तक पहुँचने की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जनता भाजपा और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में निरंतर विकास, स्थिरता और सुरक्षा का भविष्य देखती है।
1. क्या आप मानते हैं कि 1035 से 1654 विधायकों तक की यह यात्रा वास्तव में “मोदी है तो मुमकिन है” को साकार करती है?
2. क्या आपको लगता है कि नरेंद्र मोदी का नेतृत्व आने वाले वर्षों में भाजपा की राज्यों में ताकत को और भी बढ़ाएगा?
हृदय की कलम से
आपका
धनंजय सिंह खींवसर