रविवार का सदुपयोग – अंश : 141 वाँ

 
रविवार का सदुपयोग 
 
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
 
अंश : 141 वाँ 
 
ऑपरेशन सिंदूर: रणनीति से रणभूमि तक…आतंकपरस्त पाकिस्तान को भारत का मुंहतोड़ जवाब….!
 
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भारत के लिए हमेशा से सिर दर्द रहा है और थोड़े-थोड़े अंतराल पर पाकिस्तान ने लगातार भारत की जमीन पर आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया है। पहलगाम में जब आतंकियों ने निर्दोष लोगों पर धर्म पूछकर हमला बोला और महिलाओं व बच्चों के सामने पुरुषों को गोली मार दी। वह केवल एक आतंकी वारदात नहीं थी बल्कि भारत की सहनशीलता की परीक्षा थी। यह हमला जिसने पूरे देश को झकझोर दिया, केवल स्थानीय या सीमित घटना नहीं थी। इसके पीछे छिपा था पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जिसकी जड़ें सीमापार तक फैली थीं। लेकिन इस बार भारत ने पहले से तय रणनीति, सटीक योजना और ठोस कूटनीति के साथ जवाब देने का निर्णय लिया। 
 
भारतीय सेना ने जिस साहस और दक्षता के साथ ‘ऑपेरशन सिंदूर’ चलाते हुए सीमापार आतंकी ठिकानों पर निशाना साधा, वह भारतीय सैन्य बलों के अदम्य शौर्य का प्रतीक था। यह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि आतंक के विरुद्ध भारत के संकल्प का प्रतीक था। भारतीय वायुसेना ने सटीक बमबारी कर आतंकी लॉन्च पैड्स को ध्वस्त किया, वहीं सेना के विशेष बलों ने सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकियों के प्रशिक्षण शिविरों को जड़ से खत्म किया।
 
रणनीति की शुरुआत माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और हमारी सेना ने शुरुआत से ही स्पष्ट किया कि यह लड़ाई पाकिस्तान की आम जनता या सेना से नहीं बल्कि उसके द्वारा पोषित आतंकवाद और उनके ठिकानों से है। लेकिन पाकिस्तान ने इन आतंकवादियों को राजकीय सम्मान के साथ विदा किया मानो वे आतंकी नहीं पाकिस्तान के बहुत बड़े सेनानी हो। यह बात इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान भले ही कंगाली और बदहाली के दौर् से गुजर रहा हो लेकिन वह अपनी जमीन से आतंकवाद का पोषण करना नहीं छोड़ता।
 
पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में भारतीय सैनिक ठिकानों और आम जनता पर लगातार हमले शुरू कर दिए। जवाब में भारत द्वारा भी सैन्य कमांडरों, खुफिया एजेंसियों और विदेश मंत्रालय के बीच समन्वय स्थापित करते हुए हर कदम सोच-समझकर उठाया गया ताकि कोई मासूम प्रभावित न हो लेकिन आतंक का आधार समूल नष्ट हो। पर पाकिस्तान अपने नापाक हरकतों से बाज नहीं आया।
 
यहां गौर करने वाली बात यह रही कि भारत ने न केवल सैन्य रणनीति में चतुराई दिखाई बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने बताया कि यह कार्रवाई आतंकवाद के विरोध में है, न कि युद्ध भड़काने के लिए।
 
पाकिस्तान ने हमेशा की तरह झूठ का सहारा लेकर सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय प्रेस में भारत को दोषी ठहराने की कोशिश की। उसने झूठे वीडियो, तस्वीरें और आंकड़े फैलाकर दुनिया को गुमराह करना चाहा। लेकिन भारत ने संयम रखते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की श्रृंखला शुरू की, जहां भारतीय सेना और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने एक-एक झूठ का सबूतों के साथ खंडन किया और भारतीय सेना की गतिविधियों की जानकारी देश को दी।
 
भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम इस पूरे अभियान में भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और खुफिया एजेंसियों के समन्वय और अदम्य साहस ने दुनिया को चकित कर दिया। उनके अदम्य साहस, अनुशासन और बलिदान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत शांति चाहता है लेकिन आतंकवाद के सामने झुकने वाला नहीं है।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि यह नया भारत है जो न तो बौखलाहट में कोई निर्णय लेता है, न ही डरकर चुप बैठता है। यह भारत हर आतंकी हरकत का जवाब देगा लेकिन मानवता के सिद्धांतों का पालन करते हुए।
 
अब जबकि दोनों देशों के बीच सीज़फायर घोषित हो गया है, भारत ने फिर एक बार अपनी मानवतावादी नीति का परिचय दिया है। भारत का एकमात्र उद्देश्य यह था कि निर्दोष व्यक्तियों की जान न जाए, शांति बनी रहे और आतंक के खिलाफ कठोर संदेश जाए। लेकिन भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान ने फिर आतंकियों को शह दी, ट्रेनिंग दी और उन्हें भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया तो अगली बार भारत इसे युद्ध की शुरुआत मानेगा और इसका जवाब ऐसा होगा कि पाकिस्तान लंबे समय तक उसे याद रखेगा।
 
भारत हमेशा से ही युद्ध का पक्षधर नहीं रहा है। लेकिन “शांति” का मतलब कायरता नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने यह स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता, नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। भारतीय सेना, सुरक्षा एजेंसियां और कूटनीतिक तंत्र हर स्तर पर चौकस हैं। अब दुनिया जान चुकी है कि भारत न सिर्फ एक सैन्य महाशक्ति है, बल्कि एक जिम्मेदार शक्ति भी है जो अपने हर कदम का वैश्विक प्रभाव समझती है।
 
सीज़फायर के बाद भारत की नीति स्पष्ट है कि पाकिस्तान को अब यह समझना होगा कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। भारत हर तरह से सतर्क है और किसी भी नई आतंकी घटना का मतलब सीधे युद्ध माना जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत लगातार यह संदेश दे रहा है कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इसका सफाया जरूरी है।
 
ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य सफलता नहीं है, यह भारत की नैतिक जीत भी है। यह दिखाता है कि कैसे एक राष्ट्र, जो शांति और विकास में विश्वास रखता है, आवश्यकता पड़ने पर अपनी रक्षा के लिए कठोरतम कदम भी उठा सकता है। भारतीय सेना का शौर्य, प्रधानमंत्री मोदी का मजबूत नेतृत्व, और भारतीय जनता की एकता ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा दी जाए लेकिन बिना मानवता का उल्लंघन किए।
 
ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह नया भारत है जो अपनी शांति-प्रियता में गर्व करता है, लेकिन आतंकवाद के सामने कभी झुकेगा नहीं। भारत ने न केवल पाकिस्तान को, बल्कि पूरे विश्व को यह संदेश दिया है कि अब आतंक के लिए कोई जगह नहीं है।
 
अब यह पाकिस्तान पर निर्भर करता है कि वह इस सच्चाई को कब तक नजरअंदाज करता रहेगा। भारत अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ेगा और भविष्य में यदि कोई भी आतंकवादी हमला हुआ तो जवाब पहले से भी अधिक कठोर होगा। सीज़फायर की घोषणा होने के बाद भी पाकिस्तान द्वारा लगातार भारत की सीमाओं पर गोलीबारी और ड्रोन हमले की कोशिश की जा रही है जिसे भारतीय सेना सफलतापूर्वक नाकाम भी कर रही है लेकिन पाकिस्तान अपनी इन हरकतों से यदि बाज नहीं आया तो भारत को मजबूरन ऐसी कार्रवाई करनी पड़ेगी कि पाकिस्तान कांप उठेगा।
 
– क्या आपको लगता है कि यह सीज़फायर पाकिस्तान के लिए अंतिम चेतावनी के रूप में माना जाना चाहिए और यदि पाकिस्तान सीजफायर का उल्लंघन करता है तो उसे अब नहीं बख्शा जाना चाहिए?
 
– क्या भारत को अब आतंकवाद के विरुद्ध और अधिक आक्रामक वैश्विक मोर्चा खोलना चाहिए?
 
जय हिंद 
 
हृदय की कलम से
 
आपका 
धनंजय सिंह खींवसर