रविवार का सदुपयोग – अंश : 136 वाँ

रविवार का सदुपयोग 
 
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
 
अंश : 136 वाँ 
 
भारतीय जनता पार्टी का 46 वां स्थापना दिवस: अद्वितीय विकास यात्रा एवं स्वर्णिम भविष्य
 
आप सभी को विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं…..!
 
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में जब किसी राजनीतिक दल की बात होती है तो भारतीय जनता पार्टी एक जीवंत प्रेरणा बनकर उभरती है। एक ऐसी गौरव गाथा जिसमें त्याग, तपस्या, विचार और विकास के पदचिह्न स्पष्ट रूप से दिखते हैं। 6 अप्रैल 1980 को “राष्ट्र प्रथम” के मंत्र के साथ शुरू हुई इस यात्रा ने सत्ता की राजनीति नहीं की बल्कि विचारधारा आधारित राजनीति का स्तंभ स्थापित किया। भाजपा की नींव विचार से बनी है, सत्ता उसके लिए साधन मात्र है, उद्देश्य सदैव भारत माता की सेवा रहा है।
 
पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा जनसंघ की स्थापना से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक की यह यात्रा भारत के राजनीतिक परिदृश्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थायी स्थापना का प्रमाण रही है। श्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे ओजस्वी वक्ता और भारत रत्न सम्मानित नेता इसके पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और उन्होंने भाजपा को राष्ट्र के प्रति समर्पण, संवैधानिक मूल्यों और सेवा की भावना से परिचित कराया। उस समय दो सीटों से शुरुआत करने वाली पार्टी ने सफलतापूर्वक 300 पार का लक्ष्य प्राप्त किया और आगे और भी ऊंचाई छूने को तत्पर है।
 
आज भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसमें “व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश” की भावना व्यवहार में दिखाई देती है। जब बाकी राजनीतिक दल परिवारवाद और वंशवाद की जकड़न में जूझ रहे हैं वहीं भाजपा में एक सामान्य कार्यकर्ता मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का जीवन स्वयं में लोकतंत्र की शक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई, देश को नए आत्मविश्वास से भर दिया और करोड़ों युवाओं को यह यकीन दिलाया कि कर्म से भाग्य बदला जा सकता है।
 
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते एक दशक से अधिक समय में भाजपा ने देश को कई ऐतिहासिक निर्णयों से परिचित कराया है, चाहे वह धारा 370 की समाप्ति हो, राम मंदिर का निर्माण हो या समान नागरिक संहिता की दिशा में उठाए गए कदम। इन फैसलों में एक बात साफ दिखती है, भाजपा अपने वैचारिक संकल्प से कभी नहीं डिगती। इसके विपरीत विपक्षी दल जहां सत्ता के लिए समझौतावादी नीतियों को अपनाते हैं, वहीं भाजपा राष्ट्रवाद, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव के मूलमंत्र पर अडिग रहती है।
 
भाजपा की संगठनात्मक संरचना भी अद्वितीय है। यहां केवल बड़े नामों को ही नहीं बल्कि अंतिम पंक्ति के कार्यकर्ता को भी नेतृत्व का अवसर मिलता है। हालिया चुनावों में हमने देखा कि कैसे साधारण कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठाया गया। यह केवल भाजपा में संभव है जहां “कर्म” ही पहचान बनती है न कि किसी वंश का नाम।
 
आजादी के अमृत काल में भाजपा ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” का मूलमंत्र केवल एक नारा नहीं बल्कि नीति बन चुका है जिसके तहत भारत के हर नागरिक को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी जा रही है। पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, आयुष्मान भारत जैसे कार्यक्रमों ने देश के सबसे वंचित वर्ग तक विकास की किरण पहुंचाई है। 
 
भाजपा की यह विशेषता भी रही है कि सत्ता में रहते हुए भी उसने कभी अपने मूल विचारों से समझौता नहीं किया। यह पार्टी केवल चुनावी जीत के लिए रणनीति नहीं बनाती, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यता को पुनर्स्थापित करने की दीर्घकालीन योजना पर कार्य करती है। भाजपा की हर नीति भविष्य की दिशा तय करती है न कि केवल चुनावी गणित।
 
सवाल उठता है कि भाजपा और अन्य दलों में अंतर क्या है? तो उत्तर स्पष्ट है…दूसरे दल सत्ता को लक्ष्य मानते हैं, भाजपा सेवा को साधन मानती है। वहाँ विचार नहीं, व्यक्ति केंद्रित राजनीति होती है; यहाँ कार्यकर्ता ही नेतृत्व बन जाता है। वहाँ लोकतंत्र का मुखौटा है, यहाँ लोकतंत्र की जीवंतता है। इसी के चलते भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है…सदस्य संख्या के लिहाज से ही नहीं, बल्कि विचार, दृष्टिकोण, सेवा और संकल्प के स्तर पर भी। यह भारत की चेतना की पुनर्स्थापना की यात्रा है जो भविष्य में भी नित नवीन आयाम स्थापित करने को तत्पर है।
 
– क्या आप मानते हैं कि भाजपा में लोकतंत्र केवल संविधान में नहीं,बल्कि व्यवहार में भी जीवंत है और एक आम कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकता है?
 
– क्या आप मानते हैं कि भाजपा का राष्ट्रवादी दृष्टिकोण, उसकी स्पष्ट विचारधारा और कार्यकर्ता आधारित ढांचा ही उसे अन्य दलों से श्रेष्ठ बनाता है?
 
हृदय की कलम से
 
आपका 
धनंजय सिंह खींवसर