रविवार का सदुपयोग – अंश - 105 वां

 

रविवार का सदुपयोग 
 
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
 
अंश – 105 वां 
 
हम जीवित हैं क्योंकि हमारी संस्कृति जीवित हैं, 
हम जीवित हैं क्योंकि हमारी परम्पराएँ जीवित हैं।
 
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को रखें सुरक्षित
 
भारत की संस्कृति समृद्ध है और यही हमारी पहचान बन गई है। चाहे वह धर्म हो, कला हो, बौद्धिक उपलब्धियाँ हों या प्रदर्शन कलाएँ हों, इसने हमें एक रंगीन, समृद्ध और विविधतापूर्ण राष्ट्र बनाया है। हमारा देश एक शक्तिशाली और बहु-संस्कृति वाला समाज है क्योंकि इसने कई संस्कृतियों को आत्मसात किया है और आगे बढ़ा है। यहाँ के लोगों ने विभिन्न धर्मों , परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन किया है।
 
भारतीय संस्कृति के निर्माण के पीछे हमारे देश का सदियों का इतिहास एवं इसकी वैभवशाली विरासत है, जो इसे दुनिया में सबसे पुरानी संस्कृतियों में से एक बनाती है। भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का इतिहास 5000 साल से भी अधिक पुराना है, जिसे अभी तक हमारे देश के लोगों ने संभालकर एवं सहेज कर रखा है और मुझे विश्वास है कि इसे आगे भी सुरक्षित रखा जाएगा।
 
समस्त संसार में भारत के रीति-रिवाजों एवं परंपराओं को बहुत ही विविध तथा अद्वितीय माना जाता हैं। इसी कारण से यहाँ के लोगो को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। हालाँकि आज लोग भले ही तथाकथित आधुनिक हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद हम हमारी परंपराओं को नहीं भूले हैं और रीति-रिवाजों के अनुसार त्यौहार मनाते हैं। इसलिए हम अभी भी रामायण और महाभारत से महाकाव्य सीख रहे हैं और जी रहे हैं। इसके अलावा लोग गुरुद्वारों, मंदिरों, चर्चों और मस्जिदों में जाते हैं, अपनी आस्था और धार्मिक विश्वास को पुष्ट करते हैं।
 
अनेकता में एकता, भारत की विशेषता है। यह ऐसा देश है जहां विभिन्न जाति, धर्म, भाषा एवं संस्कृति के लोग मिलजुल कर रहते हैं। भारत की संस्कृति एवं परंपरा राष्ट्रीय एकता व अखंडता का आधार है। 
 
” सर्वे भवंतु सुखिना:, सर्वे संतु निरामया:। 
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित दु:ख भागभवेत।।”
 
उच्च विचार संपन्न आर्य ऋषि ने समग्र मानव समाज के कल्याण के लिए यह प्रार्थना की थी। स्वामी विवेकानंद जैसे मनीषी ने वसुधैव कुटुंबकम मंत्र समग्र विश्व को प्रदान किया।  
 
देश की आजादी से पूर्व अलग अलग शासकों ने हमारे देश पर राज किया और इस दौरान हमारी भाषा, संस्कृति, एकता व अखंडता को अलग अलग तरीके से क्षति पहुंचाई गई। अंग्रेजों ने भारत वर्ष को विध्वंस कर भारत में धर्म के आधार पर विखंडित कर दिया। आज भी देश में कई विघटनकारी तत्व सक्रिय हैं जो देश को दुर्बल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। देश की एकता व अखंडता की रक्षा करना सिर्फ भारत सरकार का दायित्व नहीं है, बल्कि आम जनता के अंदर राष्ट्रीय चेतना और देश प्रेम की भावना जगाना हर देश प्रेमी का कर्तव्य होना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में देश को संकट में डालने वाले कार्य व विचार मन में नहीं लाने चाहिए। 
 
चाहे कोई भी राजनीतिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठन या दल हो,  देश की एकता और अखंडता को क्षति पहुंचाने का विचार मन में नहीं लाना चाहिए बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर देशहित में एकजुटता का परिचय देना चाहिए और एक राष्ट्र की परिभाषा को सही मायने में सार्थक करना चाहिए।
 
हमारी संस्कृति और परम्पराएँ हमारी जीवनधारा हैं। ये हमें हमारी अस्मिता और पहचान दिलाती हैं। हम जीवित हैं क्योंकि हमारी संस्कृति जीवित हैं, हम जीवित हैं क्योंकि हमारी परम्पराएँ जीवित हैं।
 
इनके बिना, हम अधूरे हैं। हमारी संस्कृति हमें एकता और समर्थन देती है, जबकि परम्पराएँ हमें नैतिक मूल्यों की शिक्षा देती हैं।
 
आओ मिलकर अपनी संस्कृति को समृद्ध बनाएं और परम्पराओं को आगे बढ़ाएं। इससे हमारी अस्मिता और पहचान सुरक्षित रहेगी। हमारी संस्कृति और परम्पराएँ हमारी जीवंतता का प्रतीक हैं।
 
जय हिंद
 
1. क्या आप मानते हैं कि देश की एकता, अखंडता और संस्कृति की सुरक्षा सबकी साझी जिम्मेदारी है?
 
2. क्या आप मानते हैं कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और विरासत आज भी जीवित है?
 
हृदय की कलम से।
 
आपका 
धनंजय सिंह खींवसर