
रविवार का सदुपयोग
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
अंश चौथा
आज के ब्लॉग का विषय
राष्ट्रवाद की नींव पर होगा मजबूत राष्ट्र का निर्माण
भारत देश विविधताओं में एकता वाला देश है, यहां प्रत्येक राज्य की अलग-अलग भाषा बोली सभ्यता और संस्कृति है, लेकिन जब बात राष्ट्र के सम्मान की हो तो पूरा देश तिरंगे की छांव में एकजुटता के साथ खड़ा होता है, भारत देश की यही विशेषता भारत देश को विश्व के अन्य सभी देशों से अलग करती है। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में राष्ट्रवाद का महत्व काफी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि कुछ देश विरोधी ताकते भारत को तोड़ने का प्रयास कर रही है, इन देशविरोधी ताकतों को आगे बढ़ता भारत को हजम नहीं हो रहा है।
दुश्मन देशों के नापाक इरादों के चलते हो रही फंडिंग से देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने का सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो देश के भीतर रहकर विदेशी ताकतों के इशारों पर धर्म, जाति, वर्ग के आधार पर विभाजन पर देश को तोड़ने की कोशिश कर रहें है। ऐसे लोग को पहचान कर इनसे सावधान रहने की भी आवश्यकता है। ऐसे में हम सभी देशवासियों को देश की अस्मिता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रवाद की भावना को अंगीकार करना आवश्यक है, राष्ट्र के प्रति सम्मान की इसी भावना को राष्ट्रवाद के रूप में परिभाषित किया गया है।
देश मे भिन्न – भिन्न प्रकार के त्यौहारों मानने और विभिन्न भाषाओं के बोलने के बावजूद “राष्ट्रवाद” ही है जो हम सभी को एकता के सूत्र में पिरोता है। यह “राष्ट्रवाद” की भावना ही है जो देश की एकता और अखंडता के खिलाफ उत्पन्न खतरों से हमारे राष्ट्र की रक्षा करता है और देश को सुदृढ़ता प्रदान करता है, हमारी मातृभूमि का महत्व जाति, पंथ, धर्म और अन्य सभी बातों से बढ़कर है। हमें स्वतंत्रता भारत के लाखों शहीद सपूतों के सर्वोच्च बलिदान के फलस्वरूप प्राप्त हुई है और यह केवल राष्ट्रवाद और देशभक्ति की वजह से ही संभव हो पाया है।
किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिए उसके नागरिकों में राष्ट्रवाद की भावना का होना जरूरी है। राष्ट्रवाद ही वह भावना है जो सैनिकों को देश की सीमा पर डटे रहने की ताकत देती है। राष्ट्रवाद की वजह से ही देश के नागरिक अपने देश के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटते।
आज पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आजादी के 75 वर्ष बाद एक बार फिर देश में राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। आज भारत के भीतर और बाहर अलगाववादी एवं विघटनकारी ताकतों से राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता पर खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में केवल राष्ट्रवाद की गहरी जड़ें ही भारत की रक्षक साबित होगी।
हाल ही में हमें यूक्रेन और रूस के युद्ध को काफी करीब से देखा और जाना है। यूक्रेन भले ही छोटा देश हों ,लेकिन युद्ध के दौरान यूक्रेन के प्रत्येक नागरिक ने राष्ट्रवाद की भावना को जगाते हुए अपने देश को बचाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी, साथ ही उसके पड़ोसी देशों ने भी पूरा सहयोग किया लेकिन भारत में हालात इसके ठीक विपरीत है, हमारे पड़ोसी देश हमेशा घात लगाए बैठे रहते हैं, एक तरफ पड़ोसी देश पाकिस्तान हमेशा हरकतें कर देश की आंतरिक एकता और अखंडता को तोड़ने का प्रयास करता है तो वही दूसरी तरफ चीन देश की आर्थिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है अन्य पड़ोसी राज्य भी भारत की बढ़ते मान और सम्मान से खुश नहीं है, इसलिए “राष्ट्रवाद” की भावना और प्रत्येक नागरिक का देश के प्रति समर्पण ही हमारे देश को अखंड बनाए रख सकती है, एक बात स्मरण रखिए की यूक्रेन के लोगों को पड़ोसी देशों ने शरण दी थी यहां ऐसा कुछ नहीं होगा क्योंकि भारत के पड़ोसियों के मसूबे जगजाहिर है, इसलिए देश में मजबूत राष्ट्रवाद और राष्ट्रवादी नेताओं का बना रहना जरूरी है।
आइए हम सभी आजादी के इस अमृत महोत्सव में यह संकल्प ले कि राष्ट्रवाद की भावना कभी कमजोर नहीं होने देंगे और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पण करने के लिए तत्पर रहेंगे।
क्या आप यह महसूस करते है कि देश के हर बच्चे में जन्म से ही “राष्ट्रवाद” का बीजारोपण होना चाहिए?
क्या देश का नेतृत्व राष्ट्रवाद विचारधारा वाले लोगों के हाथों में सौंपी रखने और देश को विखंडित करने वालों को उखाड़ फेंकने की आवश्यकता महसूस नहीं हो रहीं है?
|| भारत माता की जय ||
हृदय की कलम से !
आपका
– धनंजय सिंह खींवसर