
साप्ताहिक सूक्ष्म ब्लॉग | संवाद से परिवर्तन का प्रयास
अंश पहला
आज के ब्लॉग का विषय
जातिगत राजनीति : लोकतंत्र का एक कड़वा अध्याय
देश आज आजादी का अमृत महोत्सव माना रहा है लेकिन लोकतंत्र की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हुए आज भी अनेकों नेता “जातिगत राजनीति” को स्वयं की राजनीति प्रगति के लिए उपयोग लें रहें है, इस चक्कर में देश को दशकों पीछे धकेला जा रहा है।
मैं पक्षधर हूं की आज सभी वर्गों को लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में समान अवसर प्राप्त होने चाहिए लेकिन यदि कोई सिर्फ अपने निजी राजनैतिक स्वार्थ के लिए आज की युवा पीढ़ी को “जातिगत राजनीति” में झोकेगा तो यह देश के भविष्य के लिए अत्यंत घातक साबित होने वाला है।
जातिवाद को बढ़ावा देने वाले सभी नेता आज उन सभी ताकतों के सहयोगी के रूप में देश को नुकसान पहुंचा रहें है जो इस देश की अखंडता को समाप्त करना चाहते है और देश को विभक्त करना चाहते है।
यह कैसी राजनीति है ? और इसके सूत्रधार कौन है ?
इसके सूत्रधार वे सभी लोग है जो व्यक्तिगत स्वार्थ के चक्कर में देश और देशवासियों के साथ गद्दारी कर रहें हैं, आज जातिवाद देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, इन नफरत और जातिवाद की राजनीति के सूत्रधारों का बहिष्कार जरूरी है।
मेरा पुनः निवेदन है
भाईचारा बढ़ाएं…. नफरत नहीं…
मेरा मानना है की राजनीति का उद्देश्य “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” होना चाहिए लेकिन कुछ लोग स्वार्थ के चलते शायद इस विकास की राजनीति को कभी फलने फूलने नहीं देंगे।
21वीं सदी भारत की सदी है, युवाओं की सदी है, युवा तरुनाई की क्षमता को जातिवाद से मुक्त कर भारत के निर्माण की तरफ रुख करवाने की आवश्यकता है, आज आवश्यकता है की विकास की राजनीति हो सभी 36 कोम के लोग शांति सद्भाव के साथ रहें, इस 21वीं सदी में जातिवाद के लिए कोई स्थान नहीं है।
आइए हम संकल्प लें की हम महिला सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार, विकास और बेहतर जीवन की राजनीति को समर्थन करेंगे ना की जातिवाद की राजनीति को।
क्या आप इन जातिवाद की राजनीति से सूत्रधारों को करारा जवाब देने में सहयोग करेंगे..?
क्या आप इन जातिवाद की राजनीति से सूत्रधारों को देश बर्बाद करने से बचाने में सहयोग करेंगे…?
या
आप इन जातिवाद के सूत्रधारों का समर्थन करेंगे…?
|| भारत माता की जय ||
मन की कलम से, आपका
– धनंजय सिंह खींवसर
.