“क्रीड़ा वह साधन है जो जीवन को नई दिशा देता है; जहाँ खेल है,वहीं श्रेष्ठता और संयम का उदय होता है।”

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स्क्वैश चैंपियन से क्रिकेट प्रशासक तक की यात्रा

खींवसर राजपरिवार में जन्मे धनंजय सिंह खींवसर अनुशासन, खेल-भावना और नेतृत्व की विरासत को आगे बढ़ाते हैं। अपने युवावस्था में वे एक उत्कृष्ट स्क्वैश खिलाड़ी रहे, जहाँ उन्होंने प्रतिस्पर्धी खेल की मांग, अनुशासन और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए आवश्यक मानसिकता को गहराई से समझा। स्क्वैश कोर्ट पर मिली सफलताओं ने उनके भीतर यह विश्वास स्थापित किया कि खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि युवाओं और समाज को दिशा देने वाली एक सशक्त संस्था है।खींवसर समूह के निदेशक और युवा उद्यमी के रूप में उन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए कार्य किया। यही संतुलन—राजसी संस्कार और आधुनिक व्यावसायिक दृष्टि—आगे चलकर उनके खेल प्रशासन के दृष्टिकोण की नींव बना।स्क्वैश से क्रिकेट प्रशासन की ओर उनका कदम संयोग नहीं था; यह एक स्पष्ट दृष्टि से प्रेरित था—राजस्थान के क्रिकेट ढाँचे में पेशेवर व्यवस्था, निष्पक्षता और विश्वस्तरीय प्रणालियाँ स्थापित करना। जय शाह जैसे परिवर्तनकारी नेताओं से प्रेरित होकर वे मानते हैं कि यदि प्रशासन तकनीक, पारदर्शिता और प्रतिभा-केन्द्रित नीतियों को अपनाए, तो राजस्थान राष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

नागौर और जोधपुर जिला क्रिकेट संघों में परिवर्तनकारी नेतृत्व

राज्य स्तर पर कदम रखने से पहले धनंजय सिंह खींवसर ने नागौर जिला क्रिकेट संघ (DCA) के अध्यक्ष के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया। बाद में इस्तीफा देने के पश्चात उन्होंने जोधपुर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा और सर्वसम्मति से निर्विरोध चुने गए।


जोधपुर DCA में उनका निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना एक स्वाभाविक और गरिमामय प्रगति थी। नागौर में उनके कार्य, उनकी आधुनिक सोच और अनुशासित नेतृत्व शैली ने उन्हें खिलाड़ियों, अधिकारियों और क्रिकेट
समुदाय का विश्वास दिलाया। यह जीत किसी प्रतियोगिता से अधिक एक सामूहिक विश्वास का प्रतीक थी—कि जोधपुर को एक ऐसे प्रशासक की आवश्यकता है जो राजसी गरिमा, उद्यमी दक्षता और खिलाड़ीकेन्द्रित दृष्टिकोण को एक साथ लेकर चले।

उनके नेतृत्व में नागौर DCA ने और जोधपुर DCA आज भी निम्नलिखित सुधारों का लाभ उठा रहा है:


 क्रिकेट अवसंरचना का आधुनिकीकरण


 पारदर्शी और मेरिट-आधारित चयन प्रणाली


 ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम


 अकादमियों, कोचों और जिला अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय


 महिला क्रिकेट और युवा विकास पर विशेष ध्यान


उन्होंने जिला क्रिकेट में पेशेवर प्रबंधन की संस्कृति स्थापित की, जहाँ कार्यप्रणालियाँ स्पष्ट हों, जवाबदेही सुनिश्चित हो और परिणाम मापनीय हों। उनके कार्यों ने उन्हें राजस्थान के क्रिकेट जगत में एक विश्वसनीय और दूरदर्शी प्रशासक के रूप में स्थापित किया।

राजस्थान क्रिकेट का स्थायी विश्वास: क्यों बारबार चुने गए धनंजय सिंह खींवसर

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की एडहॉक समिति में दो बार नेतृत्व परिवर्तन हुआ—पहले गंगानगर विधायक जयदीप बिहानी के अधीन और बाद में डी.डी. कुमावत के अधीन। इन परिवर्तनों के बीच एक चीज़ स्थिर रही—धनंजय सिंह खींवसर पर सरकार, खेल प्रेमियों और क्रिकेट समुदाय का अटूट विश्वास।

 

वे दोनों एडहॉक समितियों में एकमात्र सदस्य थे जिन्हें निरंतर बनाए रखा गया। यह दुर्लभ निरंतरता उनके पेशेवर आचरण, स्थिर नेतृत्व और विश्वसनीयता का प्रमाण है।

 

पहली समिति को तीन-तीन महीने के तीन विस्तार मिले, और दूसरी समिति को भी दो विस्तार दिए गए—जो RCA के संक्रमणकाल की लंबी अवधि को दर्शाता है। इस पूरे समय में धनंजय की उपस्थिति ने स्थिरता, निरंतरता और खिलाड़ीकेन्द्रित दृष्टिकोण प्रदान किया, जिससे वे राजस्थान क्रिकेट को अनिश्चितता से निकालकर एक पारदर्शी और संरचित भविष्य की ओर ले जाने वाले प्रमुख मार्गदर्शक के रूप में उभरे।

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में नेतृत्व और BCCI में प्रतिनिधित्व

RCA में धनंजय की भूमिका उनके प्रति जताए गए विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। उनका उदय उस समय हुआ जब राजस्थान क्रिकेट को स्थिरता, दृष्टि और आधुनिक प्रशासन की आवश्यकता थी।

 

RCA में उन्होंने निम्नलिखित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया:


 जिला क्रिकेट संघों के बीच समन्वय को मजबूत करना


 वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को बढ़ावा देना


 राज्यभर में क्रिकेट अवसंरचना के पुनरुद्धार का समर्थन


 हर जिले के खिलाड़ियों को समान अवसर उपलब्ध कराना


 तकनीक-आधारित चयन प्रणाली, डेटा-आधारित प्रदर्शन मूल्यांकन और राज्यव्यापी टैलेंट हंट कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना


उनकी नेतृत्व शैली—राजसी गरिमा, उद्यमी दक्षता और खिलाड़ीसुलभ अनुशासन—ने खिलाड़ियों, कोचों और प्रशासकों के बीच गहरा प्रभाव छोड़ा।
उनकी बढ़ती प्रतिष्ठा को तब और मान्यता मिली जब उन्हें BCCI में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। यह राजस्थान की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

राजस्थान क्रिकेट के भविष्य की दृष्टि

धनंजय सिंह खींवसर विरासत और आधुनिकता के संगम पर खड़े हैं। एक राजसी वंशज, युवा व्यवसायी और पूर्व स्क्वैश चैंपियन के रूप में वे क्रिकेट प्रशासन में मूल्यों का एक अनोखा मिश्रण लेकर आते हैं। उनकी दृष्टि स्पष्ट है:


 निष्पक्ष और तकनीक-सक्षम चयन


 राज्यभर में प्रतिभा की पहचान और संवर्धन


 वैश्विक मानकों पर आधारित पेशेवर शासन


 जिला क्रिकेट को राजस्थान क्रिकेट की रीढ़ के रूप में सशक्त बनाना


 ऐसा तंत्र बनाना जहाँ हर गाँव और शहर का खिलाड़ी समान अवसर पाए

 

उनकी यात्रा केवल क्रिकेट प्रशासन तक सीमित नहीं है; यह राजस्थान में एक नई खेल संस्कृति के निर्माण का संकल्प है—जो आधुनिक हो, पारदर्शी हो, समावेशी हो और महत्वाकांक्षी हो।

“क्रीडायााः साधनंश्रेयाः, शौयंसंयम एव च। यत्र क्रीडा तत्रैव जीवनस्य नूतना दिशा ”

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